Lucknow News: समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उत्तर प्रदेश के हालिया मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भाजपा सरकार पर बड़ा हमला बोला है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार पिछले नौ वर्षों में जनता के लिए कुछ ठोस नहीं कर सकी, तो अब कार्यकाल के आखिरी नौ महीनों में ये नए मंत्री भला क्या कर लेंगे। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि भाजपा राज में मुख्यमंत्री का पद केवल ‘कोरियर एंड मैसेंजर’ तक सीमित होकर रह गया है।
‘पर्ची’ सिस्टम पर अखिलेश का तंज
सपा प्रमुख ने सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस मंत्रिमंडल में मंत्रियों की अपनी कोई स्वतंत्र भूमिका नहीं होती है। उन्होंने कटाक्ष किया कि दिल्ली से केवल ‘पर्ची’ आती है और यहां के मंत्रियों को बस उसे पढ़ना होता है। अखिलेश यादव ने दावा किया कि प्रदेश में भ्रष्टाचार, महंगाई और बेरोजगारी ने अब तक के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। नए मंत्रियों के आने के बाद भी धरातल पर स्थिति में कोई बदलाव नहीं आने वाला है।
जल जीवन मिशन और ‘भ्रष्टारोपण’ पर आरोप
अखिलेश यादव ने सरकारी योजनाओं में व्यापक भ्रष्टाचार का मुद्दा उठाते हुए कहा कि विकास कार्य पूरी तरह ठप पड़े हैं। उन्होंने विशेष रूप से जल जीवन मिशन का जिक्र करते हुए कहा कि इस योजना के तहत बनाई गई पानी की टंकियां भ्रष्टाचार का बोझ नहीं सह पा रही हैं और लगातार गिर रही हैं। पूर्व मुख्यमंत्री ने सरकार के वृक्षारोपण अभियान को भी ‘भ्रष्टारोपण’ करार दिया और आरोप लगाया कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा विभाग बदहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं।
स्मार्ट मीटर और आरक्षण पर घेराबंदी
विपक्ष के नेता ने स्मार्ट मीटर योजना को उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने का जरिया बताया। उन्होंने कहा कि सरकार बिजली उपभोक्ताओं की जेब से पैसा निकालकर बड़े उद्योगपतियों की तिजोरियां भर रही है। नौकरियों के मुद्दे पर उन्होंने भाजपा पर आरक्षण घोटाले का गंभीर आरोप लगाया। अखिलेश ने कहा कि सरकार जानबूझकर पिछड़ों और दलितों के हक-अधिकार छीन रही है, जिससे युवाओं में भारी असंतोष और नाराजगी व्याप्त है।
फिल्म स्क्रीनिंग पर ‘कर्मफल’ का संदेश
हालिया फिल्म स्क्रीनिंग को लेकर भी अखिलेश यादव ने चुटीले अंदाज में कटाक्ष किया। उन्होंने पूछा कि जनता जानना चाहती है कि सत्ता में बैठे लोग फिल्म सबसे आगे बैठकर देखेंगे या पीछे। उन्होंने नसीहत देते हुए कहा कि फिल्म को ध्यान से देखिएगा, शायद उसे देखने के बाद ‘कर्मफल और कंसफल’ का सिद्धांत समझ में आ जाए। उन्होंने उम्मीद जताई कि शायद इस ज्ञान से सरकार की नीतियों में कुछ सकारात्मक बदलाव देखने को मिले।


