Dehradun News: भारतीय सैन्य अकादमी की पासिंग आउट परेड इस बार हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गई है। आईएमए के 94 साल के लंबे इतिहास में पहली बार 9 महिला कैडेट्स ने पुरुष कैडेटों के साथ “अंतिम पग” पार किया। इन बेटियों ने भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी बनकर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है।
चैटवुड बिल्डिंग के सामने गूंजी कदमताल की आवाज
यूं तो सेना के विभिन्न अंगों में महिलाओं की भागीदारी पहले से रही है। लेकिन देहरादून स्थित इस प्रतिष्ठित अकादमी के लिए 13 जून 2026 का दिन बेहद खास बन गया। चैटवुड बिल्डिंग के ऐतिहासिक ड्रिल स्क्वायर पर पहली बार महिला कैडेट्स ने पुरुष साथियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर शानदार मार्च पास्ट किया।
नौ दशकों से देश को मिल रहे जांबाज अफसर
भारतीय सैन्य अकादमी की स्थापना 1 अक्टूबर 1932 को हुई थी। पिछले नौ दशकों से इस अकादमी से सिर्फ पुरुष कैडेट्स ही सैन्य अधिकारी बनकर निकलते रहे हैं। अब तक आईएमए ने भारतीय सेना को 65 हजार से अधिक जांबाज सैनिक दिए हैं, जो देश की सीमाओं की सुरक्षा कर रहे हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ली भव्य परेड की सलामी
इस बार की ऐतिहासिक पासिंग आउट परेड में कुल 481 भारतीय युवाओं ने हिस्सा लिया। इसके साथ ही 16 मित्र देशों के 34 विदेशी कैडेट्स भी इस गौरवपूर्ण पल के गवाह बने। देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मुख्य अतिथि के रूप में देहरादून पहुंचकर इस भव्य परेड की सलामी ली।
कड़ी और चुनौतीपूर्ण ट्रेनिंग के बाद मिली सफलता
इन महिला कैडेट्स ने अफसर बनने के लिए एक साल की बेहद कठिन ट्रेनिंग पूरी की है। इससे पहले अगस्त 2022 में एनडीए में महिलाओं के पहले बैच को प्रवेश मिला था। मई 2025 में ग्रेजुएट होने वाली 18 महिला कैडेट्स में से 9 ने थल सेना को चुनकर नया इतिहास रचा।
सेना में महिलाओं के अधिकार का बदला स्वरूप
भारतीय सेना में महिलाओं को चिकित्सा सेवाओं से अलग अन्य विंग में एंट्री 1992 में मिली थी। तब शॉर्ट सर्विस कमीशन के माध्यम से उन्हें अवसर दिए जाते थे। इससे पहले महिलाएं चेन्नई की ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी, आर्म्स फोर्स मेडिकल सर्विस और मिलिट्री नर्सिंग सर्विस के जरिए ही देश की सेवा कर पाती थीं।
स्थायी कमीशन पाकर सेना में संभालेंगी कमान
इस बार की पासिंग आउट परेड के बाद ये महिला कैडेट्स भारतीय सेना में सीधे स्थायी कमीशन प्राप्त करेंगी। यह ऐतिहासिक कदम केवल एक सैन्य समारोह तक सीमित नहीं है। यह असल में बदलते भारतीय समाज, आधुनिक सेना और देश की तरक्की में महिलाओं की बढ़ती भूमिका का एक बेहद मजबूत प्रतीक है।
मित्र देशों के जवानों को भी मिलती है ट्रेनिंग
देहरादून की यह अकादमी अपनी विश्वस्तरीय ट्रेनिंग और कड़े अनुशासन के लिए पूरी दुनिया में जानी जाती है। यहां न केवल हमारे देश के युवाओं को फौजी अफसर बनने की ट्रेनिंग दी जाती है, बल्कि दुनिया के कई मित्र देशों के जवान भी भारतीय वीरों के साथ मिलकर हुनर सीखते हैं।
Author: Harish Rawat


