दाऊदी बोहरा फैसले पर बढ़ा विवाद, बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और लंदन में बेटी पर जानलेवा हमला

Mumbai News: बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस जीएस पटेल और उनका परिवार इस समय भारी खतरे में है। दाऊदी बोहरा समुदाय के लीडरशिप विवाद पर फैसला सुनाने के बाद उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं। हाल ही में लंदन में उनकी बेटी को एक धमकी भरी चिट्ठी मिली है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों को पूरी तरह अलर्ट कर दिया है।

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लंदन में बेटी पर हुआ खतरनाक नकाबपोश हमला

एक मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस पटेल की बेटी अदिति पटेल को लंदन में एक अनजान लेटर मिला। इस धमकी भरे लेटर में पूरे परिवार को बर्बाद करने की बात कही गई है। आरोपियों ने इस पत्र के साथ एक मेमोरी कार्ड भी भेजा है, जिसे ब्रिटिश पुलिस ने तुरंत अपने कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।

यह पूरा मामला तब और ज्यादा गंभीर हो गया जब लंदन में ही उनकी बेटी पर एक नकाबपोश बदमाश ने अचानक हमला कर दिया। इस हिंसक हमले में अदिति की नाक की हड्डी टूट गई थी। फिलहाल ब्रिटेन की एंटी टेररिज्म यूनिट इस पूरे इंटरनेशनल साजिश नेटवर्क की बारीकी से जांच कर रही है।

जस्टिस पटेल ने भारतीय मुख्य न्यायाधीश को दी जानकारी

जस्टिस पटेल ने इस पूरे घटनाक्रम की शिकायत भारतीय उच्चायोग और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत से की है। उन्होंने कड़े शब्दों में कहा कि किसी भी कोर्ट के फैसले को यूट्यूब वीडियो जारी कर बदला नहीं जा सकता। भारतीय न्यायपालिका के इतिहास में इस तरह का दबाव बनाने का यह पहला मामला है।

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दरअसल विवाद की मुख्य वजह अप्रैल 2024 का वह ऐतिहासिक फैसला है, जिसमें जस्टिस पटेल ने मुफद्दल सैफुद्दीन को दाऊदी बोहरा समुदाय का वैध 53वां दाई-अल-मुतलक घोषित किया था। उन्होंने दूसरे विरोधी ग्रुप के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया था, जिसके बाद से ही धमकियों का यह सिलसिला शुरू हुआ।

क्या है दाऊदी बोहरा समुदाय का पूरा विवाद

दाऊदी बोहरा समाज इस्लाम के शिया संप्रदाय की एक मुख्य शाखा है, जिसकी दुनिया भर में करीब 10 लाख आबादी है। भारत में मुंबई और गुजरात इस समुदाय के सबसे बड़े केंद्र माने जाते हैं। इस धार्मिक समाज के सर्वोच्च लीडर को दाई-अल-मुतलक का खास दर्जा दिया जाता है।

साल 2014 में 52वें धर्मगुरु सैयद मोहम्मद बुरहानुद्दीन के निधन के बाद इस पद के उत्तराधिकार को लेकर असली कानूनी लड़ाई शुरू हुई थी। एक गुट मुफद्दल सैफुद्दीन के साथ था, जबकि दूसरा ग्रुप ताहेर फकरुद्दीन को असली गुरु मानता था। इसी संवेदनशील फैसले के बाद जज और उनका परिवार निशाने पर आ गया।

Reported By: Sachin Kulkarni

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