Chandigarh News: हरियाणा में मेडिकल शिक्षा का दायरा तेजी से बढ़ रहा है। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के नए शैक्षणिक सत्र की रिपोर्ट के अनुसार, इस साल राज्य में कुल 2,960 एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी। यह संख्या पिछले साल के मुकाबले 250 सीट ज्यादा है।
पड़ोसी राज्यों से आगे निकला हरियाणा, सीटों में चार गुना वृद्धि
हरियाणा में मेडिकल सीटों की संख्या पड़ोसी राज्य पंजाब से 1,110 अधिक हो गई है। इसी के साथ हरियाणा देश में एमबीबीएस सीटों के मामले में दसवें स्थान पर पहुंच गया है। साल 2013-14 में राज्य में सिर्फ 700 सीटें थीं, जो 11 साल में चार गुना बढ़कर 2,960 हो चुकी हैं।
देशभर में भी मेडिकल शिक्षा के क्षेत्र में नया रिकॉर्ड बना है। पहली बार देश के 823 मेडिकल कॉलेजों में 1.36 लाख से अधिक एमबीबीएस सीटें उपलब्ध होंगी। एनएमसी ने इस साल 25 नए मेडिकल कॉलेजों को मंजूरी दी है, जिनमें 7 सरकारी और 18 प्राइवेट कॉलेज शामिल हैं।
प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में सरकारी से अधिक सीटें उपलब्ध
इस बार देश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 63,296 सीटें और प्राइवेट संस्थानों में 73,643 सीटें होंगी। यानी इस सत्र में प्राइवेट कॉलेजों में अधिक सीटें उपलब्ध रहेंगी। हालांकि, एनएमसी की इस सूची में एम्स और जिपमर जैसे राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों की 2,900 सीटें शामिल नहीं हैं।
देश में सबसे ज्यादा एमबीबीएस सीटों के मामले में कर्नाटक 15,395 सीटों के साथ पहले स्थान पर है। इसके बाद उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और तेलंगाना का नंबर आता है। इनके बाद हरियाणा शीर्ष राज्यों में शामिल है, जबकि पंजाब में 1,850 और चंडीगढ़ में 200 सीटें हैं।
स्थानीय विद्यार्थियों को मिलेगा मेडिकल शिक्षा का बड़ा फायदा
एमबीबीएस सीटों में इस बढ़ोतरी का सीधा लाभ हरियाणा के विद्यार्थियों को मिलेगा। अब उन्हें मेडिकल की पढ़ाई के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। राज्य के भीतर ही अधिक विकल्प मिलने से योग्य छात्रों को डॉक्टर बनने का अपना सपना पूरा करने में आसानी होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडिकल सीटों के इस विस्तार से आने वाले समय में राज्य में डॉक्टरों की कमी दूर होगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों तक बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचेंगी। स्वास्थ्य क्षेत्र में हो रहा यह निवेश हरियाणा को देश का एक प्रमुख मेडिकल हब बनाने में मदद करेगा।

