स्मार्टफोन और लैपटॉप की लत से बढ़ रहा डिजिटल आई सिंड्रोम का खतरा, सोलन अस्पताल की ओपीडी में उमड़े मरीज

Solan News: हिमाचल प्रदेश के सोलन जिले में मोबाइल और डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल लोगों की आंखों पर भारी पड़ रहा है। सोलन के क्षेत्रीय अस्पताल की नेत्र ओपीडी में हर दिन 25 से 30 मरीज डिजिटल आई सिंड्रोम की गंभीर शिकायत लेकर पहुंच रहे हैं।

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आजकल मोबाइल और लैपटॉप हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। पेमेंट करने से लेकर ऑनलाइन पढ़ाई और दफ्तर के काम के लिए लोग घंटों स्क्रीन के सामने बिता रहे हैं। दिन भर स्क्रीन देखने की यह आदत अब एक बड़ी बीमारी का रूप ले रही है।

युवाओं और बच्चों में बढ़े बीमारी के लक्षण

अस्पताल आने वाले अधिकतर युवा और स्कूल जाने वाले बच्चे आंखों में जलन, धुंधला दिखने और सिरदर्द की शिकायत कर रहे हैं। सुबह उठते ही मोबाइल देखना और रात तक सोशल मीडिया चलाना इस बीमारी की मुख्य वजह है। ऑनलाइन क्लास के बाद बच्चों में यह लत ज्यादा बढ़ी है।

आसान भाषा में इसे कंप्यूटर विज़न सिंड्रोम भी कहते हैं। स्क्रीन देखते समय लोग अपनी पलकें झकाना भूल जाते हैं। एक सामान्य व्यक्ति मिनट में 15 से 20 बार पलक झपकाता है। स्क्रीन देखते वक्त यह संख्या घटकर केवल 5 से 7 बार ही रह जाती है।

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डॉक्टरों ने दी 20-20-20 नियम अपनाने की सलाह

पलकें कम झपकने से आंखों की प्राकृतिक नमी खत्म हो जाती है। इससे आंखों में सूखापन और किरकिरी फंसने जैसा अहसास होता है। एसएमओ डॉ. राकेश पवार ने बताया कि इस समस्या से बचने के लिए हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना चाहिए।

डॉक्टरों के मुताबिक स्क्रीन की ब्राइटनेस सही रखें और आंखों से 20 से 24 इंच की दूरी बनाए रखें। परेशानी बढ़ने पर खुद से ड्रॉप डालने के बजाय नेत्र विशेषज्ञ से जांच कराएं। चश्मे का नंबर बदलने या ड्राई आई के कारण भी यह दिक्कत हो सकती है।

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