संसद सत्र से पहले बदला राज्यसभा का गणित, टीएमसी सांसद कोयल मलिक का भी इस्तीफा

Delhi News: संसद के आगामी 20 जुलाई से शुरू हो रहे मानसून सत्र से ठीक पहले राज्यसभा का राजनीतिक समीकरण तेजी से बदल गया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की हार के बाद पार्टी सांसदों के इस्तीफे का सिलसिला जारी है। अब अभिनेत्री व सांसद कोयल मलिक ने भी अपना इस्तीफा सौंप दिया है।

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कोयल मलिक उर्फ रुक्मिणी से पहले सुखेंदु शेखर रॉय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बड़ाईक भी राज्यसभा सदस्यता छोड़ चुके हैं। तृणमूल कांग्रेस से अलग हुए ये तीनों नेता हाल ही में भाजपा में शामिल हो गए थे। भाजपा ने इन्हें बंगाल में होने वाले उपचुनाव के लिए अपना उम्मीदवार भी घोषित किया है।

सिर्फ 105 दिन की सांसद रहीं कोयल मलिक

इस पूरे सियासी घटनाक्रम में कोयल मलिक संभवतः सबसे कम समय तक राज्यसभा सदस्य रहने वाली नेता बन गई हैं। वह इसी साल तीन अप्रैल को उच्च सदन की सदस्य चुनी गई थीं। इस लिहाज से वह केवल 105 दिनों तक ही सांसद पद पर रहीं।

दिलचस्प बात यह है कि कोयल मलिक ने अपने इस छोटे से कार्यकाल के दौरान एक भी दिन सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया। पद छोड़ने के बाद उन्होंने दिल्ली में भाजपा के वरिष्ठ नेता भूपेंद्र यादव से मुलाकात की है। इस मुलाकात के बाद उनके भी भाजपा में जाने की अटकलें तेज हैं।

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इन लगातार इस्तीफों का सबसे बड़ा असर उच्च सदन में दलों के संख्या बल पर पड़ने वाला है। आगामी 24 जुलाई के उपचुनावों के बाद राज्यसभा में सत्ताधारी भाजपा का आंकड़ा बढ़कर 117 तक पहुंचने की पूरी संभावना है, जो पार्टी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा रिकॉर्ड होगा।

बहुमत के बिल्कुल करीब पहुंचा सत्ताधारी एनडीए

इस बढ़त के बाद भाजपा साधारण बहुमत के लिए जरूरी 123 के आंकड़े से सिर्फ छह सीट दूर रह जाएगी। यदि सदन के सात मनोनीत सदस्यों और तीन निर्दलीय सांसदों का समर्थन जोड़ दिया जाए, तो यह संख्या 127 तक पहुंच जाएगी, जो बहुमत के आंकड़े से ज्यादा है।

सत्ताधारी एनडीए गठबंधन में सहयोगी दलों की भूमिका भी काफी अहम हो गई है। एनडीए में टीडीपी, एआईएडीएमके, जदयू और एनसीपी के चार-चार सदस्य शामिल हैं। इनके अलावा शिवसेना और यूपीपीएल के दो-दो सांसद जबकि अन्य छोटे दलों के एक-एक सदस्य इस गठबंधन का हिस्सा हैं।

इन सभी सहयोगी दलों के 26 सांसदों को मिलाकर एनडीए का कुल आंकड़ा 153 तक पहुंच जाता है। यह संख्या राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए जरूरी 164 के आंकड़े से महज 11 सीट कम है। सरकार की रणनीति विधायी एजेंडों पर विपक्ष को रोकने की है।

लोकसभा में भी कमजोर हुई ममता की पार्टी

इस बड़े राजनीतिक फेरबदल का असर अब केवल राज्यसभा तक सीमित नहीं है, बल्कि लोकसभा में भी ममता बनर्जी की पार्टी काफी कमजोर हुई है। सुदीप बंदोपाध्याय और काकली घोष दस्तीदार जैसे 20 बागी सांसदों ने अलग होकर एनसीपीआई नाम से नया गुट बना लिया है।

इस नए गुट ने केंद्र की एनडीए सरकार को अपना समर्थन भी दे दिया है। इसके बाद लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास अब केवल आठ सांसद बचे हैं। कयास लगाए जा रहे हैं कि आने वाले दिनों में पार्टी के कुछ और नेता भी इस्तीफा दे सकते हैं।

इस पूरे विवाद पर नेतृत्व की ओर से भी बयान आ गया है। उन्होंने साफ कहा है कि जो लोग केंद्रीय एजेंसियों या पुलिस के दबाव में हैं, वे अपनी मर्जी से जा सकते हैं। उन्होंने एक कलाकार के रूप में कोयल का सम्मान करते हुए इस्तीफा देने के लिए शुक्रिया कहा है।

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