Hisar News: एस्सेल समूह के संस्थापक और मीडिया जगत के दिग्गज डॉ. सुभाष चंद्रा के पूज्य पिता श्री नन्दकिशोर गोयनका जी का 96 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उनका अंतिम संस्कार हरियाणा के हिसार की पावन भूमि पर किया गया, जहां समाज के विभिन्न क्षेत्रों के लोगों ने उन्हें अश्रुपूरित विदाई दी।
श्री नन्दकिशोर गोयनका जी एक प्रख्यात उद्योगपति होने के साथ-साथ महान राष्ट्रभक्त, गौसेवक और सामाजिक मार्गदर्शक थे। उनका पूरा जीवन भारतीय संस्कारों, कठोर परिश्रम और उच्च नैतिक मूल्यों पर आधारित था। उनके निधन से वैश्य समाज और राष्ट्रजीवन में एक अपूरणीय क्षति हुई है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के संस्कारों से निर्मित रहा जीवन-दर्शन
नन्दकिशोर गोयनका जी का जन्म 28 सितम्बर 1930 को हिसार में हुआ था। प्रारंभिक जीवन के संघर्षों ने उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाया। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्कारों ने उन्हें राष्ट्रसेवा के प्रति समर्पित कर दिया। उन्होंने ‘राष्ट्र प्रथम’ के मूल मंत्र को अपनी दिनचर्या में शामिल किया था।
संघ के अनुशासित स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने कभी प्रसिद्धि की इच्छा नहीं की। वे अपने प्रत्येक कार्य को ईश्वर और देश की सेवा का माध्यम मानते थे। अनुशासन, समयपालन, विनम्रता और संगठन-भाव उनके स्वभाव की सबसे बड़ी विशेषता थी, जिसने समाज को सदा प्रेरित किया।
विश्व हिंदू परिषद में गौरक्षा और सामाजिक समरसता के कार्य
वे विश्व हिंदू परिषद (VHP) के हरियाणा प्रांत के उपाध्यक्ष रहे। इसके साथ ही उन्होंने गौरक्षा की केंद्रीय टोली के सदस्य के रूप में भी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि हिंदू समाज को संगठित करना हर एक जागरूक नागरिक का सबसे बड़ा दायित्व है।
गौरक्षा को वे केवल एक आंदोलन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और कृषि की रक्षा का प्रमुख जरिया मानते थे। देश की कई बड़ी गौशालाओं के विकास में उनका योगदान अतुलनीय था। उन्होंने परिषद के सेवा, संस्कार और धर्मजागरण के कार्यों में अपना पूरा जीवन लगा दिया।
अग्रोहा धाम का विकास और समाज को दिए अमूल्य संस्कार
विश्व हिंदू परिषद के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि गोयनका जी महाराजा अग्रसेन के सच्चे वंशज थे। उन्होंने अग्रोहा धाम को वैश्य समाज के एक भव्य सांस्कृतिक और सामाजिक चेतना के बड़े तीर्थ केंद्र के रूप में स्थापित किया।
अत्यंत प्रतिष्ठित परिवार से होने के बावजूद नन्दकिशोर जी का जीवन सादगी की मिसाल था। उन्होंने अपने पुत्रों डॉ. सुभाष चंद्रा, श्री लक्ष्मी नारायण, श्री जवाहर और श्री अशोक गोयल को श्रेष्ठ संस्कार दिए। उनके संस्कारों की वजह से ही आज यह परिवार समाज के प्रति अपना उत्तरदायित्व निभा रहा है।

