Shimla News: हिमाचल प्रदेश के उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान के एक बयान पर राज्य में सियासत गरमा गई है। मंत्री ने अपने विधानसभा क्षेत्र के 700 लोगों को नौकरियां दिलाने की बात कही थी। उनका यह बयान सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इसके बाद विपक्ष ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।
हर्षवर्धन चौहान ने अपने बयान पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई गलत काम नहीं किया है। सभी नियुक्तियां आउटसोर्स व्यवस्था के तहत तय प्रक्रिया से हुई हैं। दूसरी तरफ भारतीय जनता पार्टी ने इसे बैकडोर भर्ती करार दिया है। विपक्ष ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है।
आउटसोर्स भर्ती में इंटरव्यू की प्रक्रिया नहीं होती
उद्योग मंत्री ने स्पष्ट किया कि आउटसोर्स भर्ती में इंटरव्यू जैसी कोई व्यवस्था नहीं होती है। यह नियम पहले की बीजेपी सरकार के दौरान भी लागू था। उनके मुताबिक पिछली सरकार के मंत्रियों ने भी युवाओं को रोजगार दिलाया था। ऐसे में अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार देने में कुछ गलत नहीं है।
उन्होंने पूर्व सरकार पर तंज कसा। उन्होंने कहा कि अगर बीजेपी के मंत्री और विधायक अपने लोगों को नौकरियां नहीं दिला पाए, तो यह उनकी नाकामी है। हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि उनके विधानसभा क्षेत्र में कई पिछड़े और दुर्गम इलाके हैं। वहां लंबे समय से कई सरकारी पद खाली चल रहे थे।
कैबिनेट की मंजूरी से भरे जाते हैं सभी पद
इसी वजह से आउटसोर्स के माध्यम से वहां अधिक नियुक्तियां हुई हैं। उनके क्षेत्र के स्कूलों में करीब 85 नियुक्तियां हुई हैं। जल शक्ति विभाग में लगभग 67 लोगों को रोजगार मिला। इसके अलावा योगा इंस्ट्रक्टर और आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में भी भर्तियां हुई हैं। ये सभी पद कैबिनेट की मंजूरी से भरे गए हैं।
उद्योग मंत्री ने कहा कि युवाओं को रोजगार मिलना गर्व और खुशी की बात है। उन्होंने दो टूक कहा कि भविष्य में भी वह अपने क्षेत्र के युवाओं को रोजगार दिलाने का प्रयास करेंगे। जनता के प्रति उनकी जवाबदेही है। इसके लिए बीजेपी नेताओं को आरोप लगाने के बजाय उन्हें बधाई देनी चाहिए।
बीजेपी ने उठाए सवाल और निष्पक्ष जांच मांगी
उधर, उद्योग मंत्री के बयान पर पूर्व उद्योग मंत्री और बीजेपी के वरिष्ठ विधायक बिक्रम ठाकुर ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक मंच से 700 लोगों को नौकरी देने की बात कहना बेहद गंभीर है। बिक्रम ठाकुर ने आरोप लगाया कि यह सीधे तौर पर बैकडोर भर्ती का मामला है।
उन्होंने कहा कि किसी मंत्री की सिफारिश या प्रभाव से सरकारी विभागों में नियुक्तियां होना गलत है। इससे योग्य युवाओं के साथ अन्याय होता है। बिक्रम ठाकुर ने राज्य सरकार से पूरे प्रकरण की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच कराने की मांग की है, ताकि सच सामने आ सके।

