Delhi News: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के चंद्रयान-3 और गगनयान जैसे महत्वपूर्ण स्पेस मिशनों से जुड़े वैज्ञानिकों के इस्तीफे पर केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने बड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इसे पूरी तरह से एक प्रशासनिक जरूरत और सामान्य प्रक्रिया बताया है।
केंद्रीय विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री ने स्पष्ट किया कि इसरो एक बहुत बड़ा संस्थान है, जहां कई लोग आते हैं और कई जाते हैं। उन्होंने आश्वस्त किया कि वैज्ञानिकों के आने-जाने से इसरो की कार्यक्षमता और उसकी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं की निरंतरता पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
गगनयान मिशन की सफलता के लिए इसरो ने बदले नियम, इस्तीफे और वीआरएस पर रोक
इस बीच, इसरो ने अपने सबसे महत्वपूर्ण ‘गगनयान’ मिशन की सफलता सुनिश्चित करने के लिए वैज्ञानिकों के संस्थान छोड़ने के नियमों को काफी कड़ा कर दिया है। संगठन द्वारा जारी एक नए आंतरिक मेमो के अनुसार, अब ग्रुप ‘A’ के वैज्ञानिकों और तकनीकी कर्मचारियों के इस्तीफे या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) के आवेदनों को सामान्य रूप से स्वीकार नहीं किया जाएगा।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, गगनयान और चंद्रयान-3 प्रोजेक्ट से जुड़े करीब 100 से 120 वैज्ञानिकों ने हाल ही में स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) ले ली थी। इसी के बाद 14 जुलाई को इसरो मुख्यालय ने एक आंतरिक मेमो जारी कर नियमों में सख्ती करने का यह बड़ा कदम उठाया है।
केंद्रीय मंत्री ने बताया प्रशासनिक कारण, वर्कफोर्स की मजबूती पर दिया जोर
जब पत्रकारों ने केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह से इसरो द्वारा जारी इस नए मेमो के बारे में सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि यह फैसला केवल प्रशासनिक कारणों से लिया गया है। इसका उद्देश्य यह है कि ऐसे महत्वपूर्ण मामलों में फैसले ज्यादा परिपक्व और उच्च स्तर पर लिए जा सकें।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इसरो के पास बहुत बड़ी वर्कफोर्स है और समय-समय पर नई नियुक्तियां भी होती रहती हैं। इसलिए इसे किसी विवाद के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। कार्य संस्कृति ऐसी है कि काम हमेशा सुचारू रूप से चलता रहता है।
पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ के स्टार्टअप में जाने पर बोले मंत्री, कूडनकुलम परमाणु प्लांट पर दी सफाई
इसरो के पूर्व चेयरमैन डॉ. सोमनाथ एस, जिन्होंने जनवरी 2025 तक सेवाएं दीं, चेन्नई के स्पेस स्टार्टअप ‘अग्निकुल कॉसमॉस’ में ऑब्जर्वर के रूप में शामिल हो गए हैं। इस पर मंत्री ने कहा कि किसी एक व्यक्ति के जाने से गगनयान जैसे बड़े राष्ट्रीय मिशन नहीं रुकते क्योंकि वहां रिटायर्ड वैज्ञानिक भी जुड़े रहते हैं।
वहीं, कूडनकुलम न्यूक्लियर पावर प्लांट (KKNPP) में डेटा सेंधमारी और साइबर अटैक की खबरों पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने सभी चर्चाओं को गलत बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कथित सेंधमारी का उस रणनीतिक सुविधा से कोई लेना-देना नहीं है, इसलिए किसी भी प्रकार की समीक्षा की कोई आवश्यकता नहीं है।

