Delhi News: प्रसिद्ध जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने रविवार को जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल शुरू कर दी है। वे परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के प्रदर्शन में शामिल होकर अपनी एकजुटता दिखाई है और छात्र हितों का समर्थन किया है।
सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके का कहना है कि यह आंदोलन नीट पेपर लीक तक सीमित नहीं है। वे इसे चुनावी प्रणाली में जवाबदेही और सुधार के बड़े मंच के रूप में देख रहे हैं। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में युवा, छात्र और किसान नेता शामिल हुए हैं, जो पारदर्शिता और न्याय की मांग कर रहे हैं।
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बड़ी आवश्यकता
सोनम वांगचुक ने कहा कि पिछले 40 वर्षों से शिक्षा का मुद्दा उनके दिल के बहुत करीब है। जब युवा अपनी भविष्य की चिंताओं को लेकर सड़कों पर उतरें, तो उनका चुप रहना नामुमकिन है। उन्होंने जोर दिया कि शिक्षा का असली उद्देश्य बच्चों के जीवन को बेहतर बनाना और राष्ट्र को सही दिशा प्रदान करना होना चाहिए।
प्रदर्शन के दौरान खाप पंचायतों के प्रतिनिधियों ने भी अपना पूरा समर्थन दिया है। उन्होंने दीपके को पगड़ी पहनाकर सम्मानित किया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि विभिन्न राज्यों के किसान नेताओं को दिल्ली आने से रोका जा रहा है। वे लोकतांत्रिक अधिकारों और निष्पक्ष जांच के लिए अपनी आवाज को लगातार बुलंद कर रहे हैं।
आंदोलन अब बना व्यापक राष्ट्रीय मंच
यह विरोध प्रदर्शन अब अन्य शैक्षणिक शिकायतों का केंद्र भी बन चुका है। जयपुर के एक स्कूल में छात्रा की आत्महत्या का मामला हो या अन्य परीक्षाएं, लोग न्याय पाने के लिए यहाँ जुड़ रहे हैं। किसान नेताओं ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जिम्मेदार मंत्री ने इस्तीफा नहीं दिया, तो उन्हें गंभीर राजनीतिक परिणाम भुगतने होंगे।
दीपके ने प्रदर्शनकारियों को सलाह दी कि वे इस आंदोलन को किसी एक व्यक्ति तक सीमित न रखें। उन्होंने कहा कि देश में किसी को भी मुद्दे से बड़ा नहीं बनाना चाहिए। यह लड़ाई सिर्फ एक पद से इस्तीफे के लिए नहीं, बल्कि पूरी व्यवस्था में पारदर्शिता और जनता के भरोसे को बहाल करने के लिए है।

