Space News: हमारी आकाशगंगा की गहराइयों में मौजूद सितारों के प्राचीन समूह आज भी ब्रह्मांड के कई नए रहस्यों से परदा उठा रहे हैं। अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के हबल स्पेस टेलिस्कोप ने हाल ही में एक ऐसी ही तारा प्रणाली की एक शानदार तस्वीर खींची है, जिसमें हजारों चमकीले सितारों का एक विशाल झुंड दिखाई दे रहा है।
तस्वीर में दिख रहे इस क्लस्टर का नाम NGC 6723 है, जिसे शैंडेलियर क्लस्टर के नाम से भी जाना जाता है। यह पृथ्वी से लगभग 27,000 प्रकाश वर्ष दूर धनु तारामंडल में स्थित है। अंतरिक्ष में यह किसी अनगिनत दीयों से सजे झूमर की तरह चमकता है, जहां चमकने वाली हर एक रोशनी वास्तव में एक विशाल तारा है।
क्या होते हैं ब्रह्मांड में दिखने वाले ग्लोबुलर क्लस्टर?
हबल द्वारा ली गई इस तस्वीर में एक ग्लोबुलर क्लस्टर दिखाई दे रहा है। यह दरअसल हजारों से लेकर लाखों सितारों का एक ऐसा समूह होता है, जो गुरुत्वाकर्षण बल के कारण आपस में बहुत मजबूती से बंधे होते हैं। हमारी आकाशगंगा में ऐसे 150 से अधिक ग्लोबुलर क्लस्टर मौजूद हैं, हालांकि अंतरिक्ष की धूल के कारण कई अभी छिपे हैं।
इन ग्लोबुलर क्लस्टर्स में मिल्की वे आकाशगंगा के कुछ सबसे पुराने सितारे मौजूद हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, इनमें से कई सितारों की उम्र 10 अरब वर्ष से भी अधिक है, यानी ये लगभग उतने ही पुराने हैं जितना कि हमारा ब्रह्मांड। माना जाता है कि ये क्लस्टर्स हमारी आकाशगंगा में बनने वाली सबसे शुरुआती संरचनाओं में से थे।
हबल के विशेष सर्वेक्षण से खगोलविदों को मिली बड़ी कामयाबी
इनका निर्माण उस पतली डिस्क के बनने से भी पहले हुआ था, जहां आज हमारा सूर्य चक्कर लगा रहा है। पहले खगोलविदों का मानना था कि एक ग्लोबुलर क्लस्टर के सभी सितारे एक ही समय पर बने थे और उनका रासायनिक संगठन भी एक जैसा था। लेकिन हबल जैसे आधुनिक टेलिस्कोपों के नए अवलोकनों ने इस पुरानी धारणा को पूरी तरह बदल दिया है।
हबल ने मिल्की वे के ग्लोबुलर क्लस्टर्स पर किए गए एक विस्तृत सर्वेक्षण के हिस्से के रूप में पहली बार NGC 6723 का अध्ययन किया था। इस कार्यक्रम के तहत शोधकर्ताओं ने विजुअल और नियर-इंफ्रारेड लाइट का उपयोग करके 65 अलग-अलग ग्लोबुलर क्लस्टर्स का बारीकी से अध्ययन किया। इस डेटा ने वैज्ञानिकों को इन क्लस्टर्स की उम्र समझने में मदद की है।

