Mumbai News: भारत के एविएशन (विमानन) सेक्टर के लिए एक बहुत बड़ी और सकारात्मक खबर सामने आई है। देश के एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर (बुनियादी ढांचा) क्षेत्र में वर्ष 2029 तक 4.2 लाख करोड़ रुपए तक का भारी-भरकम निवेश आने की संभावना है। सोमवार को जारी ब्रिकवर्क रेटिंग्स की एक ताजा रिपोर्ट में यह बड़ा दावा किया गया है।
इस क्रेडिबल (विश्वसनीय) रिपोर्ट के अनुसार, कुल अनुमान में वित्त वर्ष 2026 तक घोषित और लागू किए जा रहे प्रोजेक्ट्स की लगभग 3.7 लाख करोड़ रुपए की परियोजनाएं शामिल हैं। इसके अलावा, वर्ष 2029 तक शुरू होने वाले नए प्रोजेक्ट्स में करीब 50,000 करोड़ रुपए का एडिशनल (अतिरिक्त) निवेश होने की उम्मीद जताई गई है।
यात्रियों की रिकॉर्ड संख्या से बढ़ा एयरपोर्ट्स का ऑपरेटिंग रेवेन्यू
ब्रिकवर्क रेटिंग्स की रिपोर्ट में कहा गया है कि रिकॉर्ड पैसेंजर (यात्री) संख्या और एयरपोर्ट शुल्क (टैरिफ) में बढ़ोतरी के कारण वित्त वर्ष 2026 में एयरपोर्ट सेक्टर की परिचालन आय (ऑपरेटिंग रेवेन्यू) में मजबूत ग्रोथ दर्ज की गई। वहीं, वित्त वर्ष 2027 में भी घरेलू हवाई यात्रा में लगातार बढ़ोतरी जारी रहने की उम्मीद है।
रिपोर्ट के अनुसार, घरेलू पैसेंजर्स की बढ़ती डिमांड को पूरा करने के लिए वित्त वर्ष 2026 के दौरान इस सेक्टर में बड़े पैमाने पर कैपेसिटी एक्सपेंशन (क्षमता विस्तार) किया गया। इसके तहत रिजनल (क्षेत्रीय) एयरपोर्टों का तेजी से विकास किया गया और पुराने टर्मिनलों के आधुनिकीकरण (मॉडर्नाइजेशन) के काम में काफी तेजी लाई गई।
नवी मुंबई और जेवर एयरपोर्ट्स से ट्रैफिक में आएगी 10% की तेजी
ब्रिकवर्क रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर नीरज राठी ने बताया कि टियर-2 शहरों में नेटवर्क के विस्तार और नवी मुंबई तथा जेवर जैसे नए ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शुरू होने से पैसेंजर ट्रैफिक में 8 से 10 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है। उनके अनुसार, इन मजबूत घरेलू कारणों से अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्रा में आई सुस्ती का असर काफी हद तक बैलेंस हो जाएगा।
रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख है कि इंटरनेशनल (अंतरराष्ट्रीय) हवाई यात्रा की ग्रोथ फिलहाल धीमी पड़ गई है। इसका मुख्य कारण उड़ानों पर लगे प्रतिबंध, फ्यूल (ईंधन) की बढ़ती कीमतें और पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में जारी भारी तनाव है। इस भू-राजनीतिक अस्थिरता का सीधा असर भारतीय विमानन उद्योग पर साफ दिख रहा है।
पश्चिम एशिया के तनाव से इंटरनेशनल पैसेंजर ट्रैफिक प्रभावित
आंकड़ों के मुताबिक, भारत की कुल अंतरराष्ट्रीय हवाई यात्री संख्या में 38 से 40 प्रतिशत की बड़ी हिस्सेदारी अकेले पश्चिम एशिया क्षेत्र की है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन गंभीर चुनौतियों के कारण वित्त वर्ष 2027 की पहली छमाही (फर्स्ट हाफ) में ग्रोथ सीमित रह सकती है, लेकिन दूसरी छमाही में विंटर सीजन के कारण स्थिति सुधरेगी।
एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर का ओवरऑल क्रेडिट आउटलुक स्थिर बना हुआ है। हालांकि, नए टर्मिनलों और विस्तार परियोजनाओं पर भारी निवेश के कारण निकट भविष्य में कैश फ्लो (नकदी प्रवाह) पर थोड़ा दबाव जरूर रहेगा, लेकिन लगातार बढ़ती यात्रियों की संख्या इस पूरी इंडस्ट्री की वृद्धि को लॉन्ग टर्म तक बनाए रखेगी।
ऑपरेटर्स का मार्जिन बढ़ेगा और ‘उड़ान’ योजना से मिलेगा बड़ा सपोर्ट
नए टर्मिनलों का संचालन शुरू होने से वित्त वर्ष 2026 में एयरपोर्ट ऑपरेटरों का ऑपरेटिंग मार्जिन बढ़कर 53.8 प्रतिशत रहने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष 44.4 प्रतिशत था। वहीं, वित्त वर्ष 2027 में यह मार्जिन 54.5 प्रतिशत तक पहुंच सकता है, क्योंकि नए टर्मिनलों से रिटेल स्टोर और कमर्शियल सर्विसेज (व्यावसायिक सेवाओं) से अधिक आय होगी।
इस पूरे सेक्टर को केंद्र सरकार की यूडीएएन (उड़े देश का आम नागरिक) योजना से बहुत बड़ा सपोर्ट मिल रहा है। इसके तहत वित्त वर्ष 2036 तक 2.88 लाख करोड़ रुपए के कैपिटल एक्सपेंडिचर (पूंजीगत निवेश) का प्रावधान है। इसके अलावा, ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट्स में 100 प्रतिशत एफडीआई (प्रत्यक्ष विदेशी निवेश) की अनुमति भी इस क्षेत्र के विकास में अहम भूमिका निभाएगी।
