Delhi News: देश की राजधानी दिल्ली में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा की अध्यक्षता में एक हाई-प्रोफाइल राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ। इस महत्वपूर्ण बैठक में हिमाचल प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग के प्रतिनिधित्व ने सबका ध्यान खींचा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य सेवा ढांचे और केंद्रीय धन आवंटन की इस अहम चर्चा से हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री अनुपस्थित रहे।
हिमाचल के स्वास्थ्य मंत्री नदारद, सचिव ने किया वॉकआउट
सूत्रों के अनुसार, स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल की अनुपस्थिति के बारे में केंद्रीय मंत्रालय को कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई थी। इस प्रशासनिक गतिरोध के बीच, सम्मेलन में शामिल हुए राज्य के स्वास्थ्य सचिव बैठक के आधिकारिक समापन से पहले ही अचानक बाहर चले गए। इससे राजनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद (सीसीएचएफडब्ल्यू) का यह 16वां सम्मेलन सोमवार को आयोजित किया गया था। इस राष्ट्रीय बैठक का मुख्य उद्देश्य देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रणाली को मजबूत करना था। इसके साथ ही केंद्र और राज्यों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाना भी इस सत्र का प्रमुख एजेंडा था।
केंद्रीय योजनाओं के फंड उपयोग पर केंद्र-राज्य में तनातनी
केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने हाल ही में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू सरकार की कार्यप्रणाली की तीखी आलोचना की थी। उन्होंने राज्य सरकार को दिशाहीन बताते हुए केंद्रीय धन का उपयोग करने में विफल रहने का आरोप लगाया था। केंद्र के अनुसार, समय सीमा नजदीक होने के बावजूद राज्य में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं अधूरी हैं।
इसके विपरीत, हिमाचल प्रदेश के कैबिनेट मंत्रियों ने केंद्र पर लगातार पलटवार किया है। राज्य सरकार ने केंद्र पर पहाड़ी राज्यों की भौगोलिक और वित्तीय बाधाओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। राज्य ने राजस्व घाटा अनुदान में भारी कटौती का विरोध करते हुए आपदा पुनर्वास निधि जारी करने की मांग की है।
‘स्वस्थ भारत’ के बिना ‘विकसित भारत’ संभव नहीं: नड्डा
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आबादी का स्वस्थ होना अनिवार्य है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा को राष्ट्रीय विकास का सबसे महत्वपूर्ण स्तंभ घोषित किया।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति 2017 ने देश के स्वास्थ्य सेवा दृष्टिकोण में बड़ा बदलाव किया है। अब सरकार का ध्यान केवल उपचार के बजाय समग्र और निवारक स्वास्थ्य प्रणालियों पर केंद्रित है। देश भर में प्राथमिक उपचार के लिए करीब 1.85 लाख आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित किए जा चुके हैं।
स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए नए एम्स की स्थापना
नड्डा ने बताया कि देश में 23 नए एम्स और 157 से अधिक मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की गई है। सरकार इसके जरिए विशेष रूप से वंचित और आकांक्षी जिलों में स्वास्थ्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है। इस अवसर पर देश भर में चिकित्सा वितरण को सुधारने के लिए कई ऐतिहासिक नीतियां शुरू की गईं।
सम्मेलन में कई नई राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों की शुरुआत
शुरू की गई प्रमुख पहलों में राष्ट्रीय एम्बुलेंस सेवा परिचालन दिशानिर्देश 2026 शामिल है। यह नीति सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपातकालीन चिकित्सा परिवहन के लिए समान राष्ट्रीय मानक तय करेगी। इसके जरिए अस्पतालों में पहुंचने से पहले दी जाने वाली आपातकालीन देखभाल की गुणवत्ता में सुधार होगा।
केंद्रीय मंत्री ने सुमन रोडमैप 2030 भी जारी किया, जो मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करेगा। इसके साथ ही समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और एनीमिया मुक्त भारत अभियान के अगले चरण की शुरुआत की गई। इन सभी योजनाओं का उद्देश्य जमीनी स्तर पर डिजिटल ट्रैकिंग और बेहतर पोषण सुनिश्चित करना है।

