हिमाचल प्रदेश के मनाली की युवती को सोशल मीडिया पर जनजातीय समुदाय के खिलाफ आपत्तिजनक कमेंट करना पड़ा भारी, मामला दर्ज

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Lahaul-Spiti News: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू जिला अस्पताल में महिला की मौत के बाद भड़का विवाद अब सोशल मीडिया तक पहुंच गया है। मनाली की रहने वाली यशिका ठाकुर ने फेसबुक पर लाहौल-स्पीति के जनजातीय समुदाय और आरक्षण व्यवस्था को लेकर बेहद आपत्तिजनक टिप्पणी की है। इस विवादित पोस्ट के वायरल होने के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है।

लाहौल के उदयपुर पुलिस थाने में दर्ज हुई एफआईआर

यशिका के कमेंट से नाराज लाहौल-स्पीति के लोगों ने सोशल मीडिया पर तीखा विरोध दर्ज कराया। जनजातीय समुदाय के प्रति अभद्र भाषा का प्रयोग करने पर उदयपुर पुलिस स्टेशन में आरोपी युवती के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है। पुलिस ने वायरल स्क्रीनशॉट को कब्जे में लेकर कानूनी जांच शुरू कर दी है।

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विवादित कमेंट में नौकरी और आरक्षण पर उठाए सवाल

आरोपी युवती ने अपनी फेसबुक पोस्ट की टिप्पणी में लिखा था कि लाहौल-स्पीति के लोगों को आरक्षण के कारण बहुत आसानी से सरकारी नौकरी मिल जाती है। उसने ट्राइबल कम्युनिटी के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल करते हुए उनके सम्मान पर ठेस पहुंचाई थी। इसके बाद पूरे घाटी क्षेत्र के नागरिकों में भारी आक्रोश फैल गया।

दबाव के बाद वीडियो जारी कर युवती ने मांगी माफी

चारों तरफ से घिरने और कानूनी कार्रवाई के डर से यशिका ठाकुर ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी किया है। उसने सार्वजनिक रूप से माफी मांगते हुए कहा कि कुल्लू अस्पताल में महिला की मौत की घटना से वह बेहद भावुक थी। इसी वजह से यह टिप्पणी हुई, हालांकि जनता ने उसकी माफी को खारिज कर दिया है।

विधायक अनुराधा राणा ने सामाजिक सौहार्द बनाए रखने की अपील की

मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्थानीय विधायक अनुराधा राणा ने कहा कि ऐसी टिप्पणियां आपसी भाईचारे को नुकसान पहुंचाती हैं। अनुसूचित जाति और जनजाति वर्ग को मिले संवैधानिक अधिकारों के पीछे लंबा सामाजिक संघर्ष रहा है। उन्होंने सभी नागरिकों से इंटरनेट मीडिया का उपयोग पूरी जिम्मेदारी के साथ संयमित होकर करने का आग्रह किया है।

भारतीय न्याय संहिता और एट्रोसिटी एक्ट की पांच धाराएं लागू

उदयपुर थाना पुलिस ने आरोपी युवती पर कानूनी शिकंजा कसते हुए कुल पांच गंभीर धाराएं लगाई हैं। इसमें विभिन्न समुदायों के बीच शत्रुता बढ़ाने के लिए बीएनएस की धारा 196 और शांति भंग करने के लिए धारा 352 लगाई गई है। साथ ही एससी-एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 की तीन अलग-अलग धाराएं भी शामिल की गई हैं।

कुल्लू अस्पताल में महिला की मौत से जुड़ा है पूरा मामला

इस पूरे विवाद की पृष्ठभूमि बीती 21 जून को कुल्लू अस्पताल में प्रसव के दौरान हुई एक महिला की मौत से जुड़ी है। उस घटना के बाद लापरवाही के आरोप में लाहौल की डॉक्टर को सस्पेंड किया गया था। अस्पताल के मुख्य चिकित्सा अधिकारी भी इसी क्षेत्र के हैं, जिस वजह से आरोपी ने यह जातिसूचक टिप्पणी की थी।

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