Delhi News: पति-पत्नी का वैवाहिक संबंध बेहद संवेदनशील और नाजुक होता है। इस पवित्र रिश्ते में छोटी-छोटी बातों का बहुत गहरा और सीधा महत्व होता है। कई बार अनदेखे कारणों से ऐसी विकट परिस्थितियां बन जाती हैं, जब हंसती-खेलती शादी अचानक टूटने की कगार पर पहुंच जाती है।
वैवाहिक जीवन में कड़वाहट और तनाव लाता है मंगल दोष
ज्योतिष शास्त्र में कुंडली के मंगल दोष को वैवाहिक सुख के लिए बेहद हानिकारक माना गया है। यह गंभीर दोष शादी से पहले ही नहीं, बल्कि शादी के बाद भी जातक को प्रभावित कर सकता है। कुंडली के सप्तम, चतुर्थ, अष्टम या द्वादश भाव में मंगल का होना तनाव बढ़ाता है।
यदि जीवनसाथी के साथ बिना वजह बहुत अधिक विवाद या झगड़े हो रहे हों, तो ध्यान देना जरूरी है। इसके अलावा पार्टनर का दूरी बना लेना या आपसी बातचीत पूरी तरह बंद हो जाना भी इसी दोष के लक्षण हैं। यह अशुभ योग वैवाहिक सुख को धीरे-धीरे पूरी तरह नष्ट कर देता है।
शनि की महादशा और मंगल की अंतर्दशा का खतरनाक प्रभाव
ग्रहों की बदलती दशाओं का शादीशुदा जिंदगी और आपसी तालमेल पर बहुत गहरा असर पड़ता है। विशेष रूप से जो लोग शनि की महादशा से पीड़ित हैं, उनकी मुश्किलें ज्यादा बढ़ती हैं। इस स्थिति में यदि मंगल की अंतर्दशा भी सक्रिय हो जाए, तो रिश्ते में भारी कठिनाइयां शुरू हो जाती हैं।
इस अशुभ प्रभाव के कारण जीवनसाथी आपकी सही बातों को भी मानना पूरी तरह बंद कर देता है। पार्टनर में अचानक बहुत ज्यादा नशा करने की बुरी आदत पनप सकती है। वह घर और परिवार की जरूरी जिम्मेदारियों और प्राथमिकताओं पर बिल्कुल ध्यान नहीं देता है।
कई बार ग्रहों की यही प्रतिकूल महादशा सुंदर रिश्तों को खराब करने और उन्हें स्थायी रूप से तोड़ने का मुख्य कारण बनती है। यदि किसी जातक के वैवाहिक जीवन में लगातार ऐसी गंभीर परेशानियां आ रही हैं, तो उन्हें बिना देर किए किसी अनुभवी ज्योतिष विशेषज्ञ से परामर्श करना चाहिए।

