Mandi News: हिमाचल प्रदेश में इस साल के मॉनसून की धमाकेदार एंट्री हो गई है। इसके साथ ही स्थानीय लोगों के दिलों में पिछले साल मूसलाधार बारिश से मची भीषण तबाही के काले जख्म एक बार फिर ताजा हो गए हैं। मंडी जिले की सराज घाटी में पिछले साल कुदरत ने सबसे खतरनाक कहर बरपाया था।
घाटी में पिछले साल आई भीषण आपदा को पूरा एक साल बीत चुका है। लेकिन इसके बावजूद इस ग्रामीण क्षेत्र के जमीनी हालात अब तक बिल्कुल नहीं सुधरे हैं। आज भी क्षेत्र की एक बड़ी आबादी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में बेहद दयनीय और अस्थाई जीवन जीने को मजबूर है।
सराज घाटी में 15 अलग-अलग जगहों पर फटा था बादल
पिछले साल 30 जून की खौफनाक रात और एक जुलाई को सराज घाटी के गोहर, थुनाग और जंजैहली वैली में करीब 15 अलग-अलग जगहों पर अचानक बादल फट गया था। इस भीषण जल प्रलय के कारण स्थानीय लोगों के हंसते-खेलते घर, उपजाऊ खेत और मजबूत संपर्क सड़कें पूरी तरह मलबे में तब्दील हो गए थे।
इस भयानक प्राकृतिक हादसे में करीब 22 से अधिक मासूम लोगों की दर्दनाक मौत हुई थी। इसके साथ ही घाटी में कुल 500 मकान पूरी तरह से जमींदोज हो गए थे, जबकि करीब 1200 घरों को आंशिक रूप से बहुत भारी नुकसान पहुंचा था। इस भीषण त्रासदी से पूरी घाटी में हाहाकार मच गया था।
अस्सी हजार की आबादी हुई प्रभावित, सत्ताईस लोग अब भी लापता
इस प्राकृतिक आपदा का सबसे ज्यादा असर सराज घाटी के चार प्रमुख क्षेत्रों गोहर, थुनाग, जंजैहली और बगस्याड में बड़े पैमाने पर देखने को मिला था। इन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में रहने वाली करीब 80 हजार की स्थानीय ग्रामीण आबादी इस जल प्रलय से सीधे तौर पर प्रभावित हुई थी।
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार इस हादसे के बाद से आज तक करीब 27 लोग लगातार लापता चल रहे हैं, जिनका रेस्क्यू टीमों को कोई अतापता नहीं मिल सका है। इस भीषण आपदा के कारण अकेले सराज क्षेत्र में ही कुल एक हजार करोड़ रुपये से अधिक की सरकारी और निजी संपत्ति के नुकसान का आकलन किया गया था।
पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सुक्खू सरकार को जमकर घेरा
मंडी दौरे पर पहुंचे प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने आपदा के एक साल पूरे होने पर राज्य की कांग्रेस सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि सराज में भीषण त्रासदी का एक साल बीतने के बाद भी लोगों का हाल-बेहाल है और वर्तमान सरकार को जनता की कोई परवाह नहीं है।
उन्होंने आरोप लगाया कि आज भी सराज के लोग अस्थाई व्यवस्थाओं के सहारे दिन काट रहे हैं। बिजली, पानी और सड़क जैसी मूलभूत सुविधाओं को केवल कामचलाऊ ढंग से ही बहाल किया गया है। जरा सी नई बारिश होने पर ये सभी अस्थाई इंतजामात तुरंत बंद हो जाते हैं, जिससे जनता की परेशानी बढ़ जाती है।
बंद पड़ी पेयजल योजना से तीन दर्जन पंचायतों में पानी का गंभीर संकट
नेता प्रतिपक्ष ने कड़ा रोष जताते हुए कहा कि सरकार पिछले साल के जख्मों को भी नहीं भर पाई है। क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण करीब 150 करोड़ रुपये की पेयजल योजना आज भी पूरी तरह बंद पड़ी है। इस लापरवाही के कारण सराज की तीन दर्जन से अधिक पंचायतों के हजारों लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है।
उन्होंने बताया कि उन्होंने सराज के हालातों का मुद्दा कई बार विधानसभा सदन के अंदर और बाहर मुख्यमंत्री व उप-मुख्यमंत्री के समक्ष प्रमुखता से उठाया। लेकिन किसी ने कोई सुध नहीं ली। उन्होंने मुख्यमंत्री को चुनौती दी कि वे सिर्फ कागजों पर सरकार चलाने के बजाय खुद सराज का दौरा कर जमीनी हकीकत देखें।
केंद्रीय जांच टीम ने भी किया था प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
गौरतलब है कि पिछले साल 21 जुलाई को केंद्र सरकार की एक विशेष उच्च स्तरीय टीम नुकसान का अंतिम जायजा लेने सराज घाटी पहुंची थी। तत्कालीन डीसी ने केंद्रीय टीम को विस्तृत प्रोग्रेस रिपोर्ट सौंपते हुए पूरे मंडी जिले में करीब 708 करोड़ रुपये के भारी नुकसान की आधिकारिक जानकारी दी थी।
इस आपदा के दौरान अकेले करसोग क्षेत्र में महज एक ही दिन के भीतर 55 करोड़ रुपये की सरकारी संपत्ति पूरी तरह नष्ट हो गई थी। केंद्रीय टीम के दौरों और बड़े-बड़े सरकारी आश्वासनों के बावजूद आज भी सराज घाटी के पीड़ित परिवार अपने पुनर्वास के लिए सरकार की तरफ टकटकी लगाए देख रहे हैं।

