Himachal High Court: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट से एसपी राजेश वर्मा को मिली बड़ी राहत, विभागीय कार्यवाही पर लगाई अंतरिम रोक

Shimla News: हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सीटीएस (क्राइम ट्रैकिंग सिस्टम) के एसपी राजेश वर्मा को बड़ी राहत दी है। अदालत ने उनके खिलाफ चल रही विभागीय कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। जस्टिस ने केंद्रीय सिविल सेवा नियम 1965 के नियम 14 के तहत जारी चार्जशीट के आधार पर आगे की एक्शन को रोकने के निर्देश दिए हैं।

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पुलिस विभाग में 250 प्रमोशन से जुड़ा है पूरा मामला

यह पूरा विवाद पुलिस विभाग में नियमों को ताक पर रखकर की गई करीब 250 प्रमोशन से जुड़ा है। एसपी राजेश वर्मा ने मई 2025 में विजिलेंस ब्यूरो को एक लिखित कंप्लेंट दी थी। उनका आरोप था कि हेड कांस्टेबल से सीटीएस इंस्पेक्टर के पद पर किए गए प्रमोशन कोर्ट के पुराने फैसलों के खिलाफ हैं।

शिकायत के मुताबिक वर्ष 2010 के आर एंड पी (भर्ती एवं पदोन्नति) नियम हाईकोर्ट के निर्देशों पर ही बने थे। इन नियमों को सरकारी गैजेट में नोटिफाई भी किया गया था। विजिलेंस ब्यूरो के डीजी ने इस केस की जांच के बाद रिपोर्ट को मंजूरी के लिए होम डिपार्टमेंट और एडिशनल चीफ सेक्रेटरी के पास भेजा था।

डीजीपी पर लगे गंभीर आरोप और कोर्ट में याचिका दायर

याचिका में आरोप है कि डीजीपी ने इस शिकायत पर सख्त एक्शन लेने के बजाय प्रमोशन को हरी झंडी देने की सिफारिश सरकार को भेज दी। इसके साथ ही उन्होंने नियमों में बदलाव का सुझाव भी दिया। इस बात से परेशान होकर एसपी वर्मा ने नवंबर 2025 में हाईकोर्ट में सिविल रिट पिटीशन फाइल कर दी।

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हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने के तुरंत बाद दिसंबर 2025 में एसपी राजेश वर्मा को सस्पेंड कर दिया गया था। इस सस्पेंशन ऑर्डर को भी अदालत में चुनौती दी गई थी, जिस पर जनवरी 2026 में स्टे मिल गया था। इसके बाद विभाग ने जनवरी के आखिर में उन्हें एक नया चार्जशीट थमा दिया था।

इस नए चार्जशीट और विभागीय इंक्वायरी के खिलाफ एसपी वर्मा ने फिर से कोर्ट का रुख किया। सीनियर एडवोकेट की दलीलों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने इस पूरी इंटरनल प्रोसीडिंग्स पर अंतरिम स्टे लगा दिया है। इस फैसले से पुलिस महकमे में चल रही अंदरूनी खींचतान अब पूरी तरह सामने आ गई है।

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