Nainital News: उत्तराखंड में विशेषज्ञ डॉक्टरों के बड़े पैमाने पर हुए तबादलों से स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई हैं। इस गंभीर मामले पर अब उत्तराखंड हाई कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने राज्य सरकार को स्थिति स्पष्ट करने के सख्त निर्देश दिए हैं। इस महत्वपूर्ण जनहित याचिका पर अगली सुनवाई शुक्रवार को होगी।
यह मामला राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (सालसा) की ओर से दायर जनहित याचिका से जुड़ा है। प्राधिकरण ने प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने पूर्व में भवाली सेनिटोरियम को सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में तब्दील करने के आदेश भी दिए थे।
नैनीताल जिला अस्पताल में डॉक्टरों की भारी कमी
गुरुवार को सुनवाई के दौरान प्राधिकरण के सदस्य सचिव प्रदीप मणि त्रिपाठी ने कोर्ट में हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र दिया। सालसा के वकील दुष्यंत मैनाली ने दलील दी कि बिना सोचे-समझे किए गए डॉक्टरों के ट्रांसफर से पहाड़ी क्षेत्रों में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है।
अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि नैनीताल के बीडी पांडे जिला अस्पताल से छह विशेषज्ञ डॉक्टरों को हटा दिया गया। इनके बदले में महज पांच सामान्य डॉक्टरों की तैनाती की गई। अस्पताल भेजे गए एकमात्र विशेषज्ञ सर्जन ने भी वहां जॉइन करने से पूरी तरह इनकार कर दिया है।
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में फैकल्टी के पद खाली
कुमाऊं के सबसे बड़े हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज की हालत भी बेहद चिंताजनक हो गई है। यहां से एक साथ 16 विशेषज्ञ डॉक्टरों का ट्रांसफर कर दिया गया। अब प्रसूति रोग विभाग में केवल दो विशेषज्ञ बचे हैं, जबकि एमसीआई मानकों के अनुसार यहां कम से कम 15 डॉक्टर होने चाहिए।
हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में वर्तमान में फैकल्टी के करीब 112 पद खाली पड़े हैं। यह कुल स्वीकृत पदों का लगभग 45 प्रतिशत है। वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी और न्यायमूर्ति पंकज पुरोहित की खंडपीठ ने सरकार को शुक्रवार तक का समय दिया है।

