कोटा मेडिकल कॉलेज में प्रसव के बाद दो प्रसूताओं की मौत, चार की हालत गंभीर होने पर जयपुर रेफर

Rajasthan News: कोटा के सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में प्रसव के बाद पिछले 48 घंटों के भीतर दो प्रसूताओं की मौत से हड़कंप मच गया है। पहली महिला ने बुधवार को दम तोड़ा, जबकि दूसरी प्रसूता की मौत गुरुवार सुबह हुई। इसी दौरान चार अन्य महिलाओं की स्थिति भी चिंताजनक पाई गई, जिन्हें प्राथमिक उपचार के बाद तत्काल जयपुर के महिला चिकित्सालय रेफर कर दिया गया है। इस दुखद घटनाक्रम ने अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्था और सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने दिए जांच के निर्देश

घटना की गंभीरता को देखते हुए गुरुवार को लोकसभा अध्यक्ष और स्थानीय सांसद ओम बिरला स्वयं अस्पताल पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की और पूरे घटनाक्रम की विस्तृत जानकारी हासिल की। बिरला ने इसे अत्यंत दुखद घटना बताते हुए उच्च स्तरीय जांच के सख्त निर्देश दिए हैं। राज्य के ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर और जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने भी चिकित्सालय का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है।

इंजेक्शन लगने के बाद बिगड़ी प्रसूताओं की सेहत

मृतक प्रसूताओं के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के गंभीर आरोप लगाए हैं। परिजनों का दावा है कि प्रसव के बाद चिकित्साकर्मियों ने महिलाओं को कोई इंजेक्शन लगाया था, जिसके तुरंत बाद उनका स्वास्थ्य बिगड़ने लगा। जानकारी के अनुसार, पांच मई को भर्ती हुई छह महिलाओं की प्रसव के बाद अचानक किडनी फेल होने की समस्या सामने आई थी। उपचार के दौरान छह मई को 28 वर्षीय पायल और गुरुवार सुबह 20 वर्षीय ज्योति की मृत्यु हो गई।

शव लेने से इनकार और परिजनों का भारी हंगामा

अस्पताल में गुरुवार सुबह उस समय तनाव व्याप्त हो गया जब ज्योति की मृत्यु के बाद परिजनों ने शव लेने से इनकार कर दिया और अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया। ज्योति को गंभीर हालत में वेंटिलेटर पर रखा गया था, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके। परिजनों ने जिम्मेदारी तय होने और मुआवजे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. नीलेश जैन ने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मौतों के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि हो पाएगी।

जयपुर से कोटा पहुंची विशेषज्ञों की विशेष टीम

चिकित्सा विभाग की प्रमुख शासन सचिव गायत्री राठौड़ ने इस पूरे प्रकरण पर संज्ञान लिया है। उन्होंने जयपुर से वरिष्ठ चिकित्सकों की एक विशेष टीम को तुरंत कोटा रवाना किया है। यह टीम दवाओं की गुणवत्ता, संक्रमण की संभावना और उपचार की प्रक्रिया की गहन जांच करेगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि इलाज में कोई कोताही या दवाओं में मिलावट पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय कर उनके विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

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