New Delhi: क्या आपको पता है कि आप रोजाना अनजाने में जहरीले रसायनों के संपर्क में आ रहे हैं? घर में मौजूद कई सामान चुपचाप आपके हार्मोन्स को असंतुलित कर रहे हैं। ये एंडोक्राइन डिसरप्टिंग केमिकल्स (EDCs) शरीर के प्राकृतिक कार्यों में बाधा डालते हैं। इससे मोटापा, थकान और थायराइड जैसी गंभीर बीमारियां होने का खतरा बढ़ जाता है।
किचन में इस्तेमाल होने वाले प्लास्टिक के डिब्बे सबसे बड़े अपराधी हैं। इनमें बीपीए (BPA) और थैलेट्स होते हैं। जब आप इनमें गरम खाना रखते हैं, तो ये जहरीले तत्व सीधे खाने में मिल जाते हैं। लंबे समय तक इनका सेवन करने से शरीर में हार्मोनल गड़बड़ी होने की पूरी संभावना रहती है।
नॉन-स्टिक बर्तनों का खतरा
नॉन-स्टिक तवे और कढ़ाई भी सेहत के लिए हानिकारक हो सकते हैं। इन पर लगी टेफ्लॉन की परत गर्म होने पर जहरीली गैसें छोड़ती है। खरोंच लगने के बाद ये केमिकल भोजन के साथ पेट में चले जाते हैं। ये रसायन सीधे आपके एंडोक्राइन सिस्टम पर हमला करते हैं और मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देते हैं।
ब्यूटी प्रोडक्ट्स भी इस लिस्ट में शामिल हैं। हम रोज जो क्रीम, लोशन या परफ्यूम लगाते हैं, उनमें पैराबेंस होते हैं। ये तत्व त्वचा के जरिए अंदर जाकर हार्मोनल संतुलन बिगाड़ते हैं। इतना ही नहीं, सुगंधित मोमबत्तियां और रूम फ्रेशनर भी थैलेट्स से भरे होते हैं, जो फेफड़ों के जरिए शरीर में प्रवेश कर जाते हैं।
सफाई के लिए उपयोग होने वाले डिटर्जेंट और फिनाइल में भी तेज रसायन मौजूद होते हैं। ये न केवल त्वचा को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि सांस के साथ शरीर में जाकर हार्मोन्स को भ्रमित करते हैं। इनके दुष्प्रभाव से महिलाओं में फर्टिलिटी और मूड स्विंग्स जैसी समस्याएं काफी आम होती जा रही हैं।
खुद को कैसे बचाएं?
बचाव का पहला कदम है प्लास्टिक को रसोई से बाहर करना। इसकी जगह कांच, स्टील या तांबे के बर्तनों का प्रयोग शुरू करें। नॉन-स्टिक के बजाय लोहे की कड़ाही या पैन का उपयोग करें। खाना बनाते समय हमेशा सुरक्षा को प्राथमिकता दें और घर पर बना ताज़ा और ऑर्गेनिक भोजन करने की आदत डालें।
पर्सनल केयर और ब्यूटी प्रोडक्ट्स खरीदते समय हमेशा लेबल जरूर पढ़ें। ऐसे उत्पादों को चुनें जो ‘पैराबिन-फ्री’ और ‘थैलेट्स-फ्री’ हों। घर की सफाई के लिए कठोर रसायनों की जगह बेकिंग सोडा या सिरके का इस्तेमाल करें। ये छोटे बदलाव आपको लंबे समय तक गंभीर बीमारियों और हार्मोनल असंतुलन से सुरक्षित रख सकते हैं।
Author: Asha Thakur


