Health News: आजकल खराब जीवनशैली और खान-पान की गलत आदतों के कारण हाई ब्लड प्रेशर की समस्या तेजी से बढ़ रही है। यह गंभीर बीमारी अब युवाओं से लेकर बुजुर्गों तक सभी को अपनी चपेट में ले रही है। कई लोग बीपी कंट्रोल करने के लिए नियमित दवाएं लेते हैं, फिर भी उनका ब्लड प्रेशर काबू में नहीं आता।
दवाइयों के बावजूद ब्लड प्रेशर कंट्रोल न होने के पीछे कई बार आपकी नींद से जुड़ी एक गंभीर बीमारी हो सकती है। इस विषय पर सटीक जानकारी साझा करते हुए मेट्रो हॉस्पिटल, फरीदाबाद के रेस्पिरेटरी, क्रिटिकल केयर एंड स्लीप मेडिसिन विभाग के सीनियर कंसलटेंट और एचओडी डॉ. लवलीन मंगला ने कई चौंकाने वाले तथ्य बताए हैं।
हाई बीपी कंट्रोल न होने की मुख्य वजह है स्लीप एपनिया
डॉ. लवलीन मंगला के अनुसार स्लीप एपनिया एक ऐसी बीमारी है जिसमें मरीज की सोते समय सांस बार-बार रुकती और शुरू होती है। ऐसे लोग रात में बहुत ज्यादा तेज खर्राटे लेते हैं। शरीर में ऑक्सीजन की सप्लाई कम होने से उनकी नींद बार-बार टूटती है और शरीर को पूरा आराम नहीं मिल पाता है।
जब सोते समय ऑक्सीजन का स्तर कम होने लगता है, तो मानव शरीर गहरे स्ट्रेस में आ जाता है। इस बार-बार होने वाले तनाव का सीधा असर दिल और ब्लड वेसल्स पर पड़ता है। रक्त वाहिकाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने से ब्लड प्रेशर हाई हो जाता है और बीपी की दवाओं का असर भी पूरी तरह खत्म होने लगता है।
हाई बीपी के मरीज कभी न छुपाएं ये गंभीर लक्षण
डॉक्टर बताते हैं कि आजकल 40 वर्ष की उम्र में ही लोगों को हाई बीपी की समस्या हो रही है। ऐसे में स्लीप एपनिया इस स्थिति को और ज्यादा जानलेवा बना देता है। यदि आपको रात में अचानक सांस रुकने से नींद टूटने या रात में ऑक्सीजन का स्तर कम होने की समस्या है, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
इसके अलावा दिनभर नींद के झटके आना, सारा दिन शरीर में भारी थकान महसूस होना, सुबह उठने पर सिर में तेज दर्द होना और किसी काम में फोकस न कर पाना भी इसके प्रमुख लक्षण हैं। यदि दवा खाने के बाद भी आपका बीपी लगातार बढ़ रहा है, तो आपको तुरंत स्लीप एपनिया की प्रामाणिक जांच करानी चाहिए।
मरीजों को डॉक्टर की विशेष सलाह
डॉ. लवलीन मंगला ने बताया कि स्लीप एपनिया का सही इलाज करने से मरीजों में ब्लड प्रेशर की दवाओं की जरूरत काफी कम हो जाती है। इस समस्या से बचने के लिए शरीर का वजन हमेशा नियंत्रण में रखें। रात को पीठ के बल सोने के बजाय हमेशा करवट लेकर सोने की आदत डालें।
इसके साथ ही एलर्जी, साइनस या नाक बंद होने की समस्या का समय पर उचित इलाज कराएं। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी नींद की गोलियों का सेवन न करें। हाई बीपी के मरीजों को समय रहते नींद से जुड़ी बीमारियों की पहचान करना बेहद जरूरी है।
Asha Thakur


