New Delhi: क्या आपको चेहरे पर छोटे काले या भूरे धब्बे दिखाई दे रहे हैं? अक्सर हम इसे सामान्य टैनिंग समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन ये पिग्मेंटेशन के शुरुआती संकेत हो सकते हैं। यह समस्या केवल धूप के कारण नहीं, बल्कि आपके खान-पान और लाइफस्टाइल से भी जुड़ी हो सकती है। आइए जानते हैं इसे पहचानने के तरीके और इसके मुख्य कारण।
पिग्मेंटेशन को समझने के लिए मेलानिन (Melanin) को जानना जरूरी है। यह हमारी त्वचा की कोशिकाओं द्वारा बनाया जाने वाला एक पिगमेंट है, जो स्किन का रंग तय करता है। जब शरीर के किसी हिस्से में मेलानिन का उत्पादन सामान्य से अधिक होने लगता है, तो त्वचा का वह हिस्सा गहरा या काला पड़ने लगता है।
पिग्मेंटेशन की पहचान कैसे करें?
पिग्मेंटेशन को पहचानना बहुत आसान है। यदि आपके चेहरे पर गालों, माथे, नाक या ऊपरी होंठ के पास भूरे या काले पैच बन रहे हैं, तो सावधान हो जाएं। त्वचा का रंग असमान दिखना, मुंहासों के ठीक होने के बाद निशानों का लंबे समय तक बने रहना और धूप में जाने पर धब्बों का गहरा होना इसके प्रमुख लक्षण हैं।
लोग अक्सर टैनिंग और पिग्मेंटेशन को एक ही मान लेते हैं, जबकि इनमें बड़ा अंतर है। टैनिंग धूप में रहने के कारण होती है और आमतौर पर पूरे चेहरे या शरीर के खुले हिस्सों पर एक समान दिखाई देती है। वहीं, पिग्मेंटेशन त्वचा के चुनिंदा हिस्सों पर गहरे धब्बे या पैच के रूप में उभरती है।
पोषण विशेषज्ञ पूजा मखीजा के अनुसार, पिग्मेंटेशन केवल बाहरी समस्या नहीं है। इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन, डिहाइड्रेशन, शरीर में प्रोटीन की कमी, नींद की कमी और जरूरी पोषक तत्वों का अभाव मुख्य जिम्मेदार हैं। जब शरीर अंदर से स्वस्थ नहीं होता, तो उसका असर सीधे आपकी त्वचा पर पिग्मेंटेशन के रूप में दिखाई देने लगता है।
धूप और बढ़ती उम्र का असर
सूरज की हानिकारक यूवी किरणें मेलानिन का उत्पादन बढ़ा देती हैं, जिससे डार्क स्पॉट्स का खतरा बढ़ जाता है। गर्भावस्था या दवाओं के कारण होने वाले हार्मोनल बदलाव भी ‘मेलास्मा’ का कारण बनते हैं। साथ ही, उम्र बढ़ने पर एज स्पॉट्स और पुराने मुंहासों के निशान भी त्वचा पर गहरा और स्थायी प्रभाव छोड़ सकते हैं।
Author: Karuna Sen, Lifestyle


