Health News: दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने एक बार फिर अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया है। एम्स के डॉक्टरों ने सांस फूलने की गंभीर बीमारी से जूझ रहे एक 57 वर्षीय मरीज को बिना ओपन हार्ट सर्जरी के नया जीवनदान दिया है।
यह मरीज सांस की गंभीर तकलीफ के कारण रात को लेटकर सो भी नहीं पाता था। वह पूरी रात बैठकर सोने को मजबूर था। डॉक्टरों के मुताबिक मरीज का वजन 135 किलोग्राम था। उसका एओर्टिक वाल्व पूरी तरह खराब हो चुका था, जिसके कारण उसकी जान पर बड़ा खतरा मंडरा रहा था।
सिर्फ 15 प्रतिशत बची थी हार्ट की पंपिंग
एम्स के प्रोफेसर डॉ. नितीश नाइक ने बताया कि इस मरीज के दिल की खून पंप करने की क्षमता घटकर महज 15 प्रतिशत ही रह गई थी। सामान्य इंसानों में यह क्षमता 55 से 70 प्रतिशत के बीच होती है। वजन ज्यादा होने के कारण पारंपरिक ओपन हार्ट सर्जरी करना डॉक्टरों के लिए बेहद जोखिम भरा था।
टावी तकनीक से किया सफल इलाज
मरीज की गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने ‘टावी’ (TAVI) यानी ट्रांसकैथेटर एओर्टिक वॉल्व इम्प्लांटेशन तकनीक का इस्तेमाल करने का बड़ा फैसला लिया। इस आधुनिक तकनीक में मरीज की छाती को खोले बिना ही एक पतली कैथेटर नली के माध्यम से खराब हो चुके वाल्व को पूरी तरह बदल दिया जाता है।
इस बेहद जटिल प्रक्रिया को 29 मिमी के बैलून-एक्सपैंडेबल वॉल्व की मदद से सफलतापूर्वक पूरा किया गया। इस सफल ऑपरेशन को अंजाम देने वाली टीम में डॉ. नितीश नाइक के साथ मशहूर हार्ट स्पेशलिस्ट डॉ. रविंदर सिंह राव और एम्स के सहायक प्रोफेसर डॉ. अमिताभ सत्संगी मुख्य रूप से शामिल रहे।
देश में हृदय रोगों से हर साल 21 लाख मौतें
इलाज के कुछ ही दिनों बाद मरीज की सेहत में चमत्कारी सुधार देखने को मिला है। अब वह बिना किसी तकलीफ के आराम से लेटकर गहरी नींद ले पा रहा है। डॉ. रविंदर ने बताया कि भारत में दिल से जुड़ी बीमारियां हर साल 21 लाख से अधिक लोगों की जान ले लेती हैं।
ऐसे संकट के समय में टावी जैसी आधुनिक और बिना चीर-फाड़ वाली तकनीकें गंभीर दिल के मरीजों के लिए एक वरदान साबित हो रही हैं। इस विधि के जरिए उन बुजुर्ग और भारी वजन वाले मरीजों का भी सुरक्षित इलाज संभव है, जिन्हें बड़ी सर्जरी के दौरान जान का सबसे ज्यादा खतरा रहता है।
Author: Asha Thakur


