Pithoragarh News: धारचूला के दूरस्थ सीमांत गांव जुम्मा में रेबीज के जानलेवा संक्रमण का एक और बेहद डरावना मामला सामने आया है। बीते महीने इसी गांव के एक मासूम बच्चे की रेबीज के कारण मौत हो गई थी। अब गांव का एक और किशोर इस खतरनाक बीमारी की चपेट में आकर गंभीर रूप से बीमार हो गया है।
बुधवार को धारचूला उप जिला चिकित्सालय से इस रेबीज पीड़ित किशोर को आनन-फानन में जिला अस्पताल पिथौरागढ़ रेफर किया गया। डॉक्टरों के मुताबिक, पीड़ित किशोर में रेबीज के बेहद गंभीर और एडवांस स्टेज के लक्षण दिखाई दे रहे हैं। इस नए मामले के सामने आने के बाद से पूरे क्षेत्र के ग्रामीण गहरे खौफ में हैं।
कुत्ते के काटने के बाद नहीं लगा था टीका
पीड़ित किशोर की पहचान जुम्मा गांव निवासी युवराज सिंह (14) पुत्र रवींद्र सिंह के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, इसी साल फरवरी महीने में गांव में ही एक आवारा कुत्ते ने उसे बुरी तरह काट लिया था। उस समय परिजनों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया और किशोर को एंटी रेबीज के जरूरी टीके नहीं लगवाए गए।
बता दें कि मई महीने में जुम्मा गांव के ही 12 वर्षीय मोहित धामी की रेबीज के गंभीर संक्रमण के कारण तड़प-तड़प कर मौत हो गई थी। उस दर्दनाक घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की एक विशेष मेडिकल टीम ने गांव का दौरा किया था। टीम ने तब कुत्ते के शिकार हुए कई ग्रामीणों को एंटी रेबीज के इंजेक्शन लगाए थे।
पानी, हवा और तेज आवाज से लग रहा है डर
फरवरी में कुत्ते के काटने के शिकार हुए युवराज सिंह में बुधवार को अचानक रेबीज के भयानक लक्षण नजर आने लगे। घबराए परिजन उसे तुरंत धारचूला सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) लेकर पहुंचे। वहां प्राथमिक जांच के बाद डॉक्टरों ने उसकी नाजुक हालत को देखते हुए उसे तुरंत जिला अस्पताल पिथौरागढ़ के लिए रेफर कर दिया।
जिला अस्पताल के वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. आशु अवस्थी ने बताया कि किशोर में रेबीज के पूरे और स्पष्ट लक्षण आ चुके हैं। वह हाइड्रोफोबिया (पानी से डर), तेज आवाज और हवा के हल्के झोकों से भी बुरी तरह डर रहा है। पीड़ित का गहन परीक्षण किया जा रहा है और उसे बेहतर इलाज के लिए जल्द ही किसी हायर सेंटर भेजा जाएगा।
लापरवाही न बरतें, तुरंत करें यह उपाय
चिकित्सकों ने बताया कि किशोर को मोहित की मौत के बाद मई में एंटी रेबीज वैक्सीन की डोज दी गई थी, लेकिन तब तक वायरस शरीर में फैल चुका था। डॉक्टरों ने सख्त सलाह दी है कि कुत्ते या किसी भी जंगली जानवर के काटते ही सबसे पहले प्रभावित अंग को बहते पानी और साबुन से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए।
घाव को धोने के बाद बिना कोई समय गंवाए नजदीकी सरकारी अस्पताल पहुंच कर एंटी रेबीज का जीवन रक्षक इंजेक्शन लगवाना बेहद आवश्यक है। रेबीज का लक्षण एक बार शरीर में उभरने के बाद मरीज का बचना लगभग नामुमकिन हो जाता है। इसलिए जानवर के काटने पर किसी भी तरह के घरेलू इलाज या झाड़-फूंक के चक्कर में बिल्कुल न पड़ें।
Author: Sunita Gupta


