World Blood Donor Day: रक्तदान करने से शरीर में आती है कमजोरी? डॉक्टर से जानिए ब्लड डोनेशन से जुड़े 5 बड़े मिथक और उनकी सच्चाई

Health News: रक्तदान को समाज में महादान का दर्जा दिया गया है क्योंकि आपका यह छोटा सा कदम हर साल दुनिया भर में लाखों लोगों की जिंदगी बचाता है। इसके बावजूद आज भी बहुत से लोग सिर्फ इसलिए खून देने से कतराते हैं क्योंकि उनके मन में इसे लेकर कई तरह के भ्रम हैं।

विश्व रक्तदान दिवस के मौके पर लोगों के मन में बैठी इन्हीं गलतफहमियों को दूर करना बेहद जरूरी है। इस विषय पर सटीक जानकारी साझा करते हुए यथार्थ सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, आगरा के सीनियर कंसलटेंट और मेडिसिन विभाग के एचओडी डॉ. लेफ्टिनेंट कर्नल सुमित लवानिया ने कई महत्वपूर्ण बातें बताई हैं।

क्या रक्तदान से शरीर में कमजोरी और बीमारी का खतरा होता है?

डॉ. सुमित लवानिया के अनुसार यह ब्लड डोनेशन से जुड़ा सबसे बड़ा और आम मिथक है कि इससे शरीर में लंबे समय के लिए कमजोरी या थकान आ जाती है। सच्चाई यह है कि हमारा शरीर दान किए गए खून की भरपाई बहुत ही कम समय में खुद कर लेता है और लोग अगले ही दिन सामान्य काम पर लौट आते हैं।

दूसरा बड़ा भ्रम यह है कि खून देने से इंसान बीमार पड़ सकता है। डॉक्टर साफ करते हैं कि सभी प्रामाणिक केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े नियमों का पालन होता है। हर डोनर के लिए पूरी तरह नए और स्टेराइल उपकरणों का ही इस्तेमाल किया जाता है जिससे संक्रमण का खतरा शून्य होता है।

दर्द, उम्र और शाकाहार से जुड़े भ्रमों का सच

बहुत से लोग सोचते हैं कि खून देने में बहुत ज्यादा दर्द और समय लगता है। सच तो यह है कि इसमें सिर्फ सुई चुभने के दौरान कुछ सेकंड का हल्का सा दर्द होता है। पूरी प्रक्रिया को खत्म होने में 15 मिनट से भी कम समय लगता है। डोनर को बस इसके बाद पर्याप्त तरल पदार्थ लेने चाहिए।

उम्र, वजन या शाकाहारी होने को लेकर भी लोगों में गलत धारणाएं हैं। डॉक्टर के मुताबिक यदि कोई व्यक्ति चिकित्सकीय रूप से पूरी तरह स्वस्थ है और हीमोग्लोबिन व वजन की जरूरी शर्तों को पूरा करता है, तो वह बिना किसी झिझक के रक्तदान कर सकता है।

Asha Thakur

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