Punjab News: पंजाब के अमृतसर में वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन के जिला प्रबंधक गगनदीप सिंह रंधावा की मौत ने देश की सियासत में उबाल ला दिया है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सोमवार को लोकसभा में संकेत दिए कि वे इस मामले में सीबीआई जांच की मांग पर विचार करेंगे। हालांकि, उन्होंने शर्त रखी है कि पंजाब के सांसदों को इसके लिए एक औपचारिक लिखित अनुरोध देना होगा।
लोकसभा में शून्य काल के दौरान यह गंभीर मुद्दा कांग्रेस सांसद गुरजीत सिंह औलख ने उठाया। उन्होंने रंधावा द्वारा मौत से पहले रिकॉर्ड किए गए उस वीडियो का हवाला दिया, जिसने पूरी व्यवस्था को हिला दिया है। रंधावा ने आरोप लगाया था कि पंजाब के पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर उन पर टेंडर के लिए अनुचित दबाव बना रहे थे। इसी मानसिक प्रताड़ना के चलते उन्होंने जहर खाकर अपनी जान दे दी।
केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू ने भी इस मुद्दे पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमराने का आरोप लगाया। बिट्टू ने दावा किया कि भुल्लर ने रंधावा को धमकी दी थी कि उनके पिता को ठेका दिया जाए। इतना ही नहीं, रंधावा की मासूम बेटी तक को डराया गया था। विपक्ष का आरोप है कि रंधावा ने आला अफसरों को शिकायत की थी, लेकिन किसी ने उनकी पुकार नहीं सुनी।
चौतरफा घिरे मंत्री भुल्लर हुए गिरफ्तार
विपक्षी दलों के भारी विरोध और पीड़ित परिवार के डटे रहने के बाद आखिरकार पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर को गिरफ्तार कर लिया गया है। उन्हें मंडी गोबिंदगढ़ से पुलिस ने हिरासत में लिया। विपक्षी दल कांग्रेस, भाजपा और शिरोमणि अकाली दल (SAD) ने इस कार्रवाई को देरी से उठाया गया कदम बताया है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री भगवंत मान की सरकार सिर्फ इस्तीफा मांगकर खानापूर्ति कर रही थी।
अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने राज्य सरकार की कार्रवाई को महज एक दिखावा करार दिया है। उन्होंने कहा कि सत्ता में बैठे रसूखदार लोगों को बचाने की कोशिश हो रही है। SAD सांसद हरसिमरत कौर बादल ने भी अमित शाह को पत्र लिखकर स्वतंत्र जांच की मांग की है। उन्होंने रंधावा के उच्च शिक्षित होने और उनके साथ हुए शारीरिक हमले का जिक्र भी किया।
एफआईआर के अनुसार, भुल्लर के पिता के पक्ष में टेंडर देने के लिए अपराधियों के जरिए धमकियां दिलवाई गई थीं। हरसिमरत ने आरोप लगाया कि रंधावा ने डिप्टी कमिश्नर और एमडी तक अपनी बात पहुंचाई थी। लेकिन एक शक्तिशाली मंत्री के दबाव में प्रशासन ने आंखें मूंद ली थीं। इसी बेबसी ने रंधावा को आत्मघाती कदम उठाने पर मजबूर कर दिया।
गिरफ्तारी से पहले भुल्लर ने खुद को बताया निर्दोष
गिरफ्तारी से ठीक पहले पूर्व मंत्री लालजीत सिंह भुल्लर ने अपनी चुप्पी तोड़ी। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि उन पर लगाए जा रहे आरोप पूरी तरह झूठे हैं। भुल्लर ने दावा किया कि उन्होंने कभी भी ईमानदारी से समझौता नहीं किया है। उन्होंने इस पूरे प्रकरण को खुद के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश बताया और कहा कि वे सच्चाई के रास्ते पर डटे रहेंगे।
रंधावा का परिवार अब भी सीबीआई जांच पर अड़ा हुआ है। उनका कहना है कि जब तक स्वतंत्र एजेंसी जांच नहीं करेगी, तब तक न्याय की उम्मीद कम है। परिवार का आरोप है कि रंधावा को टेंडर प्रक्रिया के लिए मानसिक रूप से तोड़ दिया गया था। अब सबकी नजरें गृह मंत्रालय के अगले कदम पर टिकी हैं।
गगनदीप सिंह रंधावा एक होनहार अधिकारी थे, जिनके पास पीएचडी और एमबीए जैसी बड़ी डिग्रियां थीं। उनकी मौत ने पंजाब के प्रशासनिक ढांचे में रसूखदारों के दखल की पोल खोल दी है। इस मामले में सीबीआई जांच की आहट ने अब पंजाब की राजनीति में एक नया तूफान खड़ा कर दिया है।


