Himachal Pradesh: राज्य निर्वाचन आयोग की ट्रांसजेंडर आइकन माया ठाकुर ने समाज की मुख्यधारा से कटे अपने समुदाय के लिए बड़ी पहल की है। उन्होंने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू को एक पत्र लिखकर कानूनी और व्यवस्थागत सुधारों की मांग उठाई है। माया ने आपराधिक और श्रम कानूनों में संशोधन पर जोर देते हुए ‘हिमाचल प्रदेश सिस्टमिक रिफॉर्म्स इनिशिएटिव’ का प्रस्ताव रखा है। उनका कहना है कि इस वर्ग को अब केवल सहानुभूति नहीं, बल्कि ठोस बदलाव और समान अवसर चाहिए।
माया ठाकुर ने शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में होने वाले गहरे भेदभाव को समुदाय की सबसे बड़ी बाधा बताया है। उनके अनुसार, उत्तर भारत में आज भी किसी ट्रांसजेंडर व्यक्ति के लिए सम्मानजनक नौकरी पाना एक सपना बना हुआ है। वे कहती हैं कि समाज में व्याप्त पूर्वाग्रहों के कारण उन्हें रहने के लिए कमरा तक नहीं मिलता। माया ने मांग की है कि सरकार केवल योजनाओं का वादा न करे, बल्कि उन्हें पुलिस, वकालत और शिक्षण जैसे क्षेत्रों में नियुक्त करे।
यूरोपीय देशों की तर्ज पर मिले रोजगार और सम्मान
माया ने जर्मनी और नॉर्वे जैसे देशों का उदाहरण देते हुए वहां के समावेशी कानूनों की सराहना की है। उन्होंने मुख्यमंत्री को सुझाव दिया कि हिमाचल सरकार यूरोपीय देशों के साथ विशेष साझेदारी करे। इससे राज्य के ट्रांसजेंडर युवाओं को विदेश में सुरक्षित और गरिमामय रोजगार मिल सकेगा। माया का मानना है कि खाड़ी देशों के बजाय यूरोपीय देशों का कार्य वातावरण उनके समुदाय के लिए अधिक सुरक्षित और सम्मानजनक साबित हो सकता है।
पिछले वर्ष प्रदेश सरकार ने युवाओं को दुबई और सऊदी अरब में डिलीवरी राइडर के रूप में भेजने की पहल की थी। माया ने इस कदम का स्वागत किया, लेकिन साथ ही तकनीकी कौशल विकास की जरूरत पर भी बल दिया। उन्होंने प्रस्ताव दिया कि यूरोपीय इंजीनियरों को प्रशिक्षण के लिए हिमाचल बुलाया जाए। साथ ही हिमाचली छात्रों को वहां के तकनीकी संस्थानों में भेजा जाए। इससे राज्य की श्रम शक्ति अधिक कुशल बनेगी और वैश्विक मानकों को पूरा कर सकेगी।
माया ठाकुर की इस पहल में आपराधिक कानूनों में बदलाव की मांग प्रमुखता से शामिल है। उनका दावा है कि वर्तमान में मजदूरों का शोषण बढ़ रहा है और कानून का डर कम होता जा रहा है। वे चाहती हैं कि राज्य में ऐसी व्यवस्था बने जहां हर वर्ग सुरक्षित महसूस करे। माया के अनुसार, हिमाचल को अब पुरानी घिसी-पिटी नीतियों के बजाय बड़े ढांचागत बदलाव की जरूरत है ताकि हर नागरिक गौरव के साथ जीवन जी सके।
इस पत्र के माध्यम से माया ठाकुर ने एक बार फिर ट्रांसजेंडर समुदाय के संघर्षों को सत्ता के गलियारों तक पहुंचाया है। अब सबकी नजरें मुख्यमंत्री सुक्खू पर टिकी हैं कि क्या वे इस समुदाय को समाज की अगली कतार में लाने के लिए कड़े फैसले लेंगे। माया का कहना है कि वे केवल अपने लिए नहीं, बल्कि उन हजारों युवाओं के लिए लड़ रही हैं जो काबिल होने के बावजूद पहचान के कारण पीछे छूट जाते हैं।

