सौरव गांगुली ने मैच फिक्सिंग कांड पर किया चौंकाने वाला खुलासा, ‘सचिन से सीधे पूछा था- तुझे किसी ने अप्रोच किया?’

Kolkata News: भारतीय क्रिकेट टीम के सबसे सफल कप्तानों में शुमार सौरव गांगुली ने साल 2000 के कुख्यात मैच फिक्सिंग विवाद पर कई अनसुने राज खोले हैं। ‘दादा’ ने हाल ही में एक पॉडकास्ट के दौरान बताया कि उस चुनौतीपूर्ण दौर में उन्होंने सचिन तेंदुलकर, राहुल द्रविड़ और अनिल कुंबले जैसे दिग्गजों से व्यक्तिगत रूप से इस विषय पर सवाल किए थे। गांगुली ने यह जानने की कोशिश की थी कि क्या कभी किसी सट्टेबाज ने उन्हें गलत काम के लिए संपर्क (approach) किया था।

भारतीय क्रिकेट का सबसे काला दौर और गांगुली की कप्तानी

साल 2000 का वह समय भारतीय क्रिकेट के लिए किसी काले अध्याय से कम नहीं था। दक्षिण अफ्रीकी कप्तान हैंसी क्रोन्ये इस घोटाले के मुख्य सूत्रधार बनकर उभरे थे, जबकि भारतीय खेमे से मोहम्मद अज़हरुद्दीन और अजय जडेजा जैसे बड़े नाम इस विवाद की चपेट में आए थे। खेल की साख पूरी तरह दांव पर थी और प्रशंसकों का भरोसा टूट चुका था। इसी संकट के बीच 27 वर्षीय सौरव गांगुली को कप्तानी की बागडोर सौंपी गई थी, जिन्हें तब समस्या की गंभीरता का पूरा अंदाजा नहीं था।

सचिन और कुंबले से गांगुली का वह सीधा सवाल

यूट्यूबर राज शमानी के साथ बातचीत में गांगुली ने स्वीकार किया कि नेतृत्व संभालने से पहले वे इन सब बातों से अनभिज्ञ थे। उन्होंने बताया कि उन्होंने सचिन से स्पष्ट रूप से पूछा था, “तुझे किसी ने पूछा?” सचिन ने तुरंत इनकार कर दिया। यही सवाल दादा ने द्रविड़ और अनिल कुंबले से भी किया था और सभी का जवाब ‘नहीं’ में था। इन खिलाड़ियों की ईमानदारी ने गांगुली को यकीन दिलाया कि भारतीय क्रिकेट को दोबारा खड़ा करना संभव है और टीम में अभी भी ‘साफ’ खिलाड़ी मौजूद हैं।

दिग्गजों का नेतृत्व और शुरुआती घबराहट

गांगुली ने याद किया कि अज़हरुद्दीन और जडेजा पर प्रतिबंध लगने के बाद टीम को एकजुट करना एक बड़ी चुनौती थी। उन्हें उन सीनियर्स को लीड करना था, जिनके तहत वे खुद खेल चुके थे। कोच्चि में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ पहले मैच की पूर्व संध्या पर वे बहुत नर्वस थे। उन्होंने अपनी पत्नी डोना से साझा किया था कि वे मीटिंग संक्षिप्त रखेंगे क्योंकि उनके सामने सचिन और अज़हर जैसे महारथी बैठे थे। हालांकि, जीत के साथ इस नए सफर की शानदार शुरुआत हुई।

गांगुली ने कैसे बदली टीम इंडिया की तकदीर?

कोच्चि और जमशेदपुर की जीत ने भारतीय क्रिकेट में एक नई ऊर्जा फूंक दी थी। गांगुली ने न केवल नई पीढ़ी को तैयार किया, बल्कि टीम को निडर होकर विदेशों में जीतना सिखाया। उनकी कप्तानी में भारत ने 2002 की नेटवेस्ट ट्रॉफी, चैंपियंस ट्रॉफी (संयुक्त विजेता) और 2003 विश्व कप के फाइनल तक का सफर तय किया। गांगुली के इसी विजन ने युवराज सिंह, वीरेंद्र सहवाग और हरभजन सिंह जैसे लड़ाकों को तराशा, जिन्होंने आगे चलकर भारतीय क्रिकेट को विश्व विजेता बनाया।

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