Punjab News: पंजाब के बरनाला जिले में खाकी को शर्मसार करने वाला एक बड़ा खुलासा हुआ है। कस्बा धनौला की पुलिस ने नकली पुलिसकर्मी बनकर घूम रहे तीन शातिरों के एक गिरोह को रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। ये आरोपी पंजाब पुलिस की वर्दी पहनकर न केवल राहगीरों को डराते-धमकाते थे, बल्कि युवाओं को सरकारी नौकरी का झांसा देकर लाखों की ठगी भी कर रहे थे।
धनौला पुलिस समाज विरोधी तत्वों के खिलाफ एक विशेष चेकिंग अभियान चला रही थी। इसी दौरान पुलिस को गुप्त सूचना मिली कि कुछ बाहरी व्यक्ति पुलिस की वर्दी का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं। वे भोले-भाले लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। इस पुख्ता जानकारी के बाद जब पुलिस ने छापेमारी की, तो एक सफेद इनोवा कार में सवार तीन नकली मुलाजिमों को धर दबोचा गया।
पकड़े गए आरोपियों की पहचान संदीप कुमार, अजय कुमार और गुरप्रीत सिंह के रूप में हुई है। ये तीनों आरोपी फिरोजपुर जिले के रहने वाले हैं। इनके पास से पुलिस की वर्दियां, नकली आईडी कार्ड और वारदात में इस्तेमाल की गई इनोवा कार बरामद की गई है। ये शातिर अपराधी अलग-अलग जिलों में जाकर खुद को असली पुलिसकर्मी बताकर लोगों से पैसे वसूलते थे।
बीएनएस की गंभीर धाराओं में मामला दर्ज
धनौला थाना पुलिस ने इन तीनों आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। इनके खिलाफ केस नंबर 36 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है। इसमें धोखाधड़ी, जालसाजी और सरकारी कर्मचारी का रूप धारण करने जैसी गंभीर धाराएं शामिल हैं। आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश कर रिमांड पर लिया गया है।
पुलिस पूछताछ में यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस गिरोह ने अब तक कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है। जांच के दौरान कई बड़े खुलासे होने की उम्मीद है। पुलिस को अंदेशा है कि इस गिरोह के तार पंजाब के अन्य जिलों से भी जुड़े हो सकते हैं। नकली आईडी कार्ड बनाने वाले गिरोह के अन्य सदस्यों की भी तलाश तेज कर दी गई है।
एसएसपी बरनाला के निर्देशों पर पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि इन लोगों ने पुलिस की वर्दियां और सामान कहां से हासिल किया। पुलिस ने आम जनता से अपील की है कि वे ऐसे संदिग्ध व्यक्तियों से सावधान रहें। यदि कोई पुलिसकर्मी बनकर पैसे की मांग करता है या नौकरी का झांसा देता है, तो तुरंत नजदीकी थाने में सूचित करें।
इस गिरफ्तारी से इलाके के लोगों ने राहत की सांस ली है। पुलिस रिमांड के दौरान आरोपियों के मोबाइल फोन और अन्य दस्तावेजों की भी स्कैनिंग की जा रही है। इससे इनके पुराने आपराधिक रिकॉर्ड और ठगी के शिकार हुए लोगों के बारे में अहम सुराग मिल सकते हैं। पुलिस प्रशासन ने साफ किया है कि कानून के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।


