Dehradun News: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में पर्यटन और स्थानीय युवाओं को रोजगार देने के लिए शुरू की गई सरकारी होमस्टे योजना इस समय बड़े पैमाने पर दुरुपयोग के घेरे में आ गई है। जिला प्रशासन और पर्यटन विभाग की एक संयुक्त और बड़ी जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिले में कई होमस्टे नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से होटलों और कमर्शियल इकाइयों की तरह चलाए जा रहे थे।
इस संयुक्त जांच रिपोर्ट में सबसे गंभीर तथ्य यह सामने आया है कि बड़ी संख्या में चिह्नित किए गए भवनों में खुद होमस्टे संचालक निवास ही नहीं कर रहे थे। जबकि सरकारी नियमों के अनुसार होमस्टे पंजीकरण की पहली और सबसे मूल शर्त यही है कि मालिक को वहीं रहना होगा। जांच में पाया गया कि कई स्थानों पर भवनों के पूरे के पूरे फ्लोर अवैध रूप से व्यावसायिक होटल में पूरी तरह तब्दील हो चुके थे।
मसूरी और राजपुर रोड समेत कई इलाकों में गड़बड़ी
सरकारी टीम द्वारा की गई इस सघन जांच के दौरान पर्यटन क्षेत्र से जुड़े मसूरी रोड, राजपुर रोड, सेवलाकलां, किशननगर, गंगोत्री विहार, पंडितवाड़ी, माजरा और प्रेमनगर सहित विभिन्न वीआईपी क्षेत्रों में दर्जनों फर्जी होमस्टे चिह्नित किए गए हैं। कुछ गंभीर मामलों में तो भवन मालिकों द्वारा अपनी संपत्ति दूसरों को बेचने के बाद भी पुराने सरकारी पंजीकरण पर ही होमस्टे का अवैध संचालन जारी मिला।
इसके अलावा कई जगहों पर स्थानीय प्रशासन से बिना कोई लिखित अनुमति लिए ही भवनों में अतिरिक्त कमरे और फ्लोर तैयार कर लिए गए थे, जिनका उपयोग पूरी तरह से भारी मुनाफा कमाने के लिए किया जा रहा था। प्रशासनिक रिपोर्ट के अनुसार कई होमस्टे में सरकार द्वारा निर्धारित मानकों से कहीं अधिक कमरे संचालित किए जा रहे थे, जिससे आवासीय क्षेत्रों में भीड़ और अव्यवस्था का माहौल बन रहा था।
लापरवाह संचालकों पर बड़ी कार्रवाई, 79 रजिस्ट्रेशन रद
जांच टीम को कई होमस्टे ऐसे भी मिले जिनका भौतिक संचालन तो बहुत लंबे समय से पूरी तरह बंद पड़ा था, लेकिन कागजों में उनका सरकारी पंजीकरण अभी भी सक्रिय बना हुआ था। शुक्रवार को इस पूरी जांच प्रक्रिया के मुकम्मल होने के बाद प्रशासन ने एक बड़ा कदम उठाते हुए कुल 79 होमस्टे के पंजीकरण को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मजबूत संस्तुति शासन को भेज दी है।
गौरतलब है कि इससे पहले भी विभाग द्वारा चलाए गए प्रथम चरण के चेकिंग अभियान में 17 संदिग्ध होमस्टे के पंजीकरण रद्द किए जा चुके हैं। स्थानीय जिला प्रशासन का साफ कहना है कि अब क्षेत्र में आने वाले सभी पर्यटकों की सुरक्षा के लिए उनके पुलिस सत्यापन, वाहनों की पार्किंग, भवन के वास्तविक उपयोग और मौके पर संचालक की मौजूदगी जैसे कड़े बिंदुओं पर लगातार सख्ती से जांच की जा रही है।
स्थानीय परिवारों की आय के लिए बनी थी योजना
देहरादून के जिलाधिकारी सविन बंसल ने इस पूरी कार्रवाई और योजना के मूल उद्देश्य पर विस्तार से बात की है। उन्होंने कहा कि सरकार की यह महत्वाकांक्षी होमस्टे नीति असल में पहाड़ के स्थानीय परिवारों की आय बढ़ाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने के पवित्र उद्देश्य से बनाई गई थी। लेकिन कई रसूखदार लोगों ने इसका गलत फायदा उठाते हुए इसे अपने व्यावसायिक होटल कारोबार का एक शॉर्टकट माध्यम बना लिया।
जिलाधिकारी ने सख्त लहजे में चेतावनी देते हुए कहा कि मूल भावना से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। यही मुख्य वजह है कि अब पूरे जिले भर में ऐसे नियमों का उल्लंघन करने वाले संदिग्ध प्रतिष्ठानों के खिलाफ एक व्यापक और सघन जांच अभियान लगातार चलाया जा रहा है। आने वाले दिनों में गड़बड़ी करने वाले अन्य संचालकों पर भी कानून का चाबुक चलना तय माना जा रहा है।

