Patna News: बिहार सरकार ने राज्य के लाखों अभिभावकों को एक बहुत बड़ी राहत दी है। शिक्षा विभाग ने निजी स्कूलों द्वारा हर साल ली जाने वाली पुनर्नामांकन (री-एडमिशन) फीस पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके साथ ही स्कूलों द्वारा वसूले जाने वाले अन्य कई प्रतिबंधित शुल्कों पर भी तत्काल प्रभाव से पाबंदी लगा दी गई है। सरकार ने साफ किया है कि इन कड़े नियमों का उल्लंघन करने वाले स्कूलों की मान्यता रद कर दी जाएगी।
शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेन्दर के हस्ताक्षर से यह महत्वपूर्ण आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। इस कदम का मुख्य उद्देश्य निजी विद्यालयों द्वारा अभिभावकों के किए जा रहे आर्थिक शोषण को पूरी तरह रोकना है। सरकार ने सख्त लहजे में चेतावनी दी है कि जो भी स्कूल इस आदेश की अवहेलना करेगा, उस पर न केवल भारी आर्थिक दंड लगाया जाएगा, बल्कि उसकी संबद्धता भी खत्म कर दी जाएगी।
‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत पर चलेंगे सभी स्कूल
शिक्षा विभाग ने निजी विद्यालयों के संचालकों को दोटूक शब्दों में कहा है कि स्कूलों का संचालन कोई व्यवसाय या मुनाफा कमाने का जरिया नहीं है। यह पूरी तरह से समाज सेवा का कार्य है, जिसे ‘नो प्रॉफिट, नो लॉस’ के सिद्धांत पर ही चलाया जाना चाहिए। सरकार का यह नया आदेश शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 और बिहार निजी विद्यालय (शुल्क विनियम) अधिनियम-2019 के कड़े प्रावधानों के तहत जारी किया गया है।
नए नियमों के मुताबिक, अब सभी प्राइवेट स्कूलों को अपने हर प्रकार के शुल्कों का पूरा विवरण स्कूल के मुख्य सूचना-पट्ट (नोटिस बोर्ड) और आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक करना अनिवार्य होगा। स्कूल प्रशासन सामान्य परिस्थितियों में अपनी मर्जी से फीस में कोई बढ़ोतरी नहीं कर सकेगा, ताकि अभिभावकों पर बच्चों की पढ़ाई का अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़े और छात्र बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी स्कूली शिक्षा पूरी कर सकें।
अभिभावक अपनी मर्जी की दुकान से खरीदेंगे किताबें और ड्रेस
आदेश के अनुसार, यदि किसी स्कूल में फीस बढ़ाना बेहद अनिवार्य हो, तो उन्हें तय कानूनी सीमा और विहित प्रक्रिया का पूरी तरह अनुपालन करना होगा। इसके अलावा, स्कूलों को किताबों, कॉपियों और अन्य आवश्यक सामग्रियों की सूची नोटिस बोर्ड पर लगानी होगी। कोई भी स्कूल अब अभिभावकों को किसी खास दुकान या प्रतिष्ठान से ही सामान खरीदने के लिए कतई बाध्य नहीं कर सकता है। अभिभावक अपनी सुविधानुसार किसी भी दुकान से खरीदारी कर सकते हैं।
बार-बार यूनिफॉर्म बदलने पर लगी रोक, बकाए पर नहीं रुकेगा रिजल्ट
इस आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय प्रशासन अपनी मर्जी से बार-बार पाठ्यपुस्तकों और स्कूल यूनिफॉर्म का पैटर्न नहीं बदलेंगे। अगर बदलाव बहुत जरूरी हो, तो स्कूल स्तर पर गठित ‘शिक्षक-अभिभावक संघ’ (पीटीए) की लिखित अनुमति लेना अनिवार्य होगा। स्कूल यह भी सुनिश्चित करेंगे कि छात्र-छात्राओं या उनके माता-पिता पर निर्धारित पाठ्यक्रम से अलग कोई भी अतिरिक्त अध्ययन सामग्री खरीदने का अनावश्यक दबाव न बनाया जाए।
सरकार ने छात्रों के हित में एक और संवेदनशील फैसला सुनाया है। आदेश के मुताबिक, यदि किसी छात्र की स्कूल फीस बकाया भी रहती है, तो उस स्थिति में स्कूल प्रशासन बच्चे को नियमित कक्षा में बैठने, परीक्षा देने या उसका परिणाम (रिजल्ट) रोकने से वंचित नहीं कर सकता है। जब तक नियमों के तहत जरूरी प्रक्रिया पूरी न हो, तब तक छात्र के खिलाफ कोई भी दंडात्मक कदम नहीं उठाया जा सकेगा। इस फैसले से अभिभावक संघों में खुशी की लहर है।

