Kangra News: हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में स्थित प्रदेश का सबसे दुर्गम इलाका ‘बड़ा भंगाल’ इस बार इतिहास रचने जा रहा है। आजादी के बाद पहली बार इस गांव में पंचायत चुनाव के लिए मतदान केंद्र स्थापित किया जा रहा है। दुर्गम भौगोलिक परिस्थितियों के कारण प्रशासन ने यहां चार सदस्यीय पोलिंग टीम को हेलीकॉप्टर से भेजने का निर्णय लिया है। रावी नदी के उद्गम स्थल पर बसे इस गांव में चुनाव करवाना निर्वाचन आयोग के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
बड़ा भंगाल की भौगोलिक स्थिति इतनी जटिल है कि यहां पहुंचने के लिए करीब 78 किलोमीटर का कठिन पैदल सफर करना पड़ता है। इस गांव की कुल आबादी 650 के करीब है, जिनमें से 487 मतदाता पंजीकृत हैं। इससे पहले केवल 2009 के लोकसभा चुनाव के दौरान यहां मतदान केंद्र बनाया गया था। पंचायत चुनाव के लिए अब तक यहां के ग्रामीणों को बीड़ तक आना पड़ता था। भारी बर्फबारी और खराब रास्तों की वजह से यह प्रक्रिया हमेशा मुश्किलों भरी रही है।
बिना नेटवर्क और इंटरनेट के होगा मतदान
लोकतंत्र के इस उत्सव के बीच एक हैरान करने वाला तथ्य यह है कि यहां के करीब 100 मतदाताओं को अब तक उम्मीदवारों के नाम तक नहीं पता हैं। बड़ा भंगाल में न तो मोबाइल फोन का नेटवर्क काम करता है और न ही इंटरनेट की सुविधा है। डिजिटल युग में भी यह क्षेत्र बाहरी दुनिया से पूरी तरह कटा हुआ है। ऐसे में चुनाव प्रचार यहां पारंपरिक तरीकों से ही संभव हो पा रहा है। ग्रामीण केवल मौखिक सूचनाओं के आधार पर ही अपने प्रतिनिधियों के बारे में जान पा रहे हैं।
आमतौर पर हिमाचल में पंचायत चुनाव दिसंबर और जनवरी के महीनों में आयोजित किए जाते थे। उस दौरान भारी हिमपात के कारण बड़ा भंगाल का संपर्क शेष दुनिया से पूरी तरह टूट जाता था। इसी कारणवश प्रशासन को मतदान केंद्र बीड़ में स्थानांतरित करना पड़ता था। इस बार मतदान की तिथि और मौसम की अनुकूलता को देखते हुए निर्वाचन आयोग ने गांव में ही बूथ बनाने का साहसिक फैसला लिया है। इससे बुजुर्ग और महिला मतदाताओं को काफी सुविधा होगी।
प्रशासन ने पोलिंग टीम की सुरक्षा और मतदान सामग्री पहुंचाने के लिए विशेष प्रबंध किए हैं। हेलीकॉप्टर के माध्यम से ईवीएम और अन्य चुनावी सामान सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जाएगा। पोलिंग टीम मतदान प्रक्रिया संपन्न होने के बाद वापस लौटेगी। स्थानीय लोगों में इस ऐतिहासिक कदम को लेकर काफी उत्साह देखा जा रहा है। पहली बार अपने ही गांव में वोट डालने का मौका मिलना उनके लिए किसी उत्सव से कम नहीं है। अब देखना यह है कि यह बदलाव गांव के विकास की नई इबारत कैसे लिखता है।

