नये डिग्री कॉलेजों के लिए जमीन देने पर चमकेगा पूर्वजों का नाम, उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह का बड़ा ऐलान!

Lucknow News: उत्तर प्रदेश में सरकारी डिग्री कॉलेजों के निर्माण में आ रही जमीन की बड़ी समस्या से निपटने के लिए राज्य सरकार ने एक बेहद अनोखा और नया रास्ता निकाला है। उच्च शिक्षा मंत्री संजय सिंह टाइगर ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए कहा कि नये डिग्री कॉलेजों के लिए जमीन देने वाले दानदाताओं को अब एक बड़ा सम्मान दिया जाएगा। वे कॉलेज का नामकरण अपनी इच्छा के अनुसार करवा सकेंगे।

उच्च शिक्षा मंत्री ने साफ किया कि भू-दाता चाहें तो कॉलेज का नाम अपने माता-पिता, किसी प्रियजन या अपने किसी पूर्वज के नाम पर रखवा सकते हैं। सरकारी कॉलेजों के लिए भूमि की कमी को दूर करने के लिए उच्च शिक्षा विभाग इस समय एक विस्तृत और प्रभावी कार्य योजना तैयार कर रहा है। इस नई योजना के तहत जमीन दान करने वाले दानवीरों को प्रोत्साहित करने के लिए विशेष नियम बनाए जा रहे हैं।

शहरी क्षेत्र में ढाई और ग्रामीण इलाकों में चाहिए 5 एकड़ जमीन

संजय सिंह टाइगर ने बताया कि विभाग ने नये डिग्री कॉलेजों की स्थापना के लिए जमीन का एक नया मापदंड भी जारी कर दिया है। इसके तहत अब शहरी क्षेत्रों में डिग्री कॉलेज खोलने के लिए कम से कम ढाई एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी। वहीं दूसरी ओर, यदि कॉलेज ग्रामीण क्षेत्र में बनाया जाना है, तो उसके लिए पांच एकड़ जमीन का होना बेहद अनिवार्य कर दिया गया है।

नये नियमों के मुताबिक, यदि कोई दानकर्ता कॉलेज के लिए पूरी की पूरी जमीन अकेले दान करता है, तो उसकी इच्छा के अनुसार पूरे कॉलेज का नामकरण किया जाएगा। लेकिन, यदि कोई व्यक्ति पूरी जमीन न देकर जमीन का केवल एक अंश (छोटा हिस्सा) दान करता है, तो कॉलेज के किसी एक विशिष्ट खंड जैसे भव्य पुस्तकालय, कॉमन रूम, आधुनिक प्रयोगशाला या किसी विशेष कक्षा का नाम उस दानकर्ता की इच्छानुसार रखा जाएगा।

1 जुलाई से शुरू होगी पढ़ाई, वैकल्पिक भवनों की तलाश तेज

उच्च शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि आगामी एक जुलाई से हर हाल में नये कॉलेजों में पढ़ाई शुरू करानी है। इसके लिए सभी संबंधित अधिकारियों को युद्धस्तर पर कार्रवाई करने के सख्त निर्देश जारी किए गए हैं। हालांकि, इस योजना के कार्यान्वयन में इस समय सबसे बड़ी व्यावहारिक बाधा आवश्यक भवनों और कमरों की उपलब्धता को लेकर सामने आ रही है।

इस समस्या से निपटने के लिए उच्च शिक्षा विभाग ने फिलहाल इन नये कॉलेजों को एक वैकल्पिक व्यवस्था के तहत अस्थायी भवनों में संचालित करने का एक बड़ा निर्णय लिया है। चूंकि भविष्य में इन शिक्षण संस्थानों के लिए पूरी तरह नये और भव्य भवनों की जरूरत पड़ेगी, इसलिए प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए उपयुक्त जमीन की तलाश अभी से ही शुरू कर दी है ताकि समय रहते निर्माण कार्य शुरू हो सके।

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