101 करोड़ के भूमि घोटाले में सहायक नगर आयुक्त रामकुमार गुप्ता गिरफ्तार, मुरादाबाद नगर निगम कार्यालय में मची खलबली

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Moradabad News: मुरादाबाद नगर निगम में तैनात सहायक नगर आयुक्त रामकुमार गुप्ता की 101 करोड़ रुपये के बड़े भूमि घोटाले में गिरफ्तारी के बाद गुरुवार को कार्यालय में हड़कंप मच गया। संभल पुलिस ने आरोपी अधिकारी को शहर के टाउनहॉल स्थित एक नामी होटल के बाहर से हिरासत में लिया है।

जन्म-मृत्यु और दाखिल-खारिज पटल पर मनमानी की मिल रही थीं शिकायतें

सहायक नगर आयुक्त मुरादाबाद नगर निगम में पिछले करीब डेढ़ साल से तैनात थे। उनके पास जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र और दाखिल-खारिज जैसे बेहद महत्वपूर्ण पटलों की जिम्मेदारी थी। इन दोनों ही विभागों में लगातार मिल रही मनमानी और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद उच्चाधिकारियों ने उनसे यह चार्ज वापस ले लिया था।

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नगर आयुक्त सौम्या गुरुरानी ने करीब डेढ़ महीने पहले ही उनसे यह प्रभार छीनकर केवल जोन एक की जिम्मेदारी सौंपी थी। नगर निगम में ऑनलाइन आवेदन के बावजूद प्रमाण पत्रों को रोकने और दाखिल-खारिज में सुविधा शुल्क मांगे जाने की लगातार शिकायतें मिलने पर प्रशासन ने यह सख्त कदम उठाया था।

सत्यम होटल के कमरे में रहता था ताला, मोबाइल भी हुआ बंद

मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले रामकुमार गुप्ता ने सरकारी आवास न मिलने पर टाउनहॉल के सत्यम होटल में एक कमरा किराये पर ले रखा था। बुधवार दोपहर बाद संभल पुलिस ने उन्हें इसी होटल के बाहर से दबोच लिया। सुबह जब उनका सहायक सुरजीत होटल पहुंचा, तो वहां ताला लटका मिला।

मुरादाबाद-संभल हाईवे के किनारे स्थित 38 बीघा सरकारी जमीन के 101 करोड़ रुपये के घोटाले में यह बड़ी कार्रवाई हुई है। रामकुमार पर संभल नगर पालिका के अधिशासी अधिकारी (ईओ) रहने के दौरान इस धोखाधड़ी में शामिल होने का गंभीर आरोप है। शासन स्तर पर उनके निलंबन की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

ईओ पद पर रहने के दौरान 44 लाख के भ्रष्टाचार का एक और आरोप

संभल में अपने छह साल के कार्यकाल के दौरान रामकुमार गुप्ता पर 44 लाख रुपये के एक अन्य वित्तीय भ्रष्टाचार का भी आरोप लग चुका है। इस पुराने मामले में भी शासन स्तर से दो बार कड़ी विभागीय कार्रवाई की संस्तुति की जा चुकी है, जिसकी फाइलें निदेशालय में पेंडिंग थीं।

नगर आयुक्त ने बताया कि वर्तमान में उनके पास केवल जोन एक का प्रभार था और वे जनगणना के प्रथम चरण में चार्ज अधिकारी के रूप में व्यस्त थे। स्थानीय स्तर पर उनके खिलाफ मुरादाबाद में कोई शिकायत नहीं थी। अब लखनऊ निदेशालय इस पूरे मामले का संज्ञान लेकर आगे की सख्त वैधानिक कार्रवाई कर रहा है।

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