भर्ती परीक्षाओं में धांधली और बेरोजगारी के खिलाफ सड़कों पर उतरे हजारों छात्र, क्या सरकार दोबारा कराएगी परीक्षा?

Uttar Pradesh News: सरकारी नौकरियों में कथित धांधली और बढ़ती बेरोजगारी को लेकर युवाओं का गुस्सा फूट पड़ा है। शुक्रवार को हजारों प्रतियोगी छात्र अपनी मांगों के समर्थन में सड़कों पर उतर आए। छात्रों ने सरकार से लेखपाल और यूपीएसआई जैसी बड़ी भर्तियों को पूरी तरह पारदर्शी बनाने की जोरदार मांग की है।

प्रतियोगी छात्र संघर्ष मंच के बैनर तले इस विशाल विरोध प्रदर्शन का आयोजन किया गया। छात्रों के आक्रोश को देखते हुए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए थे। मार्च के दौरान भारी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। इस आंदोलन ने भर्ती बोर्ड की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

छात्रों ने कटरा के मनमोहन पार्क से एक शांतिपूर्ण कैंडल मार्च निकाला था। उनकी योजना सुभाष चौराहा होते हुए आजाद पार्क तक जाने की थी। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि पुलिस ने उन्हें हिंदू छात्रावास के पास ही रोक दिया और आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी।

पुलिस द्वारा रोके जाने के बाद छात्रों ने किसी तरह आजाद पार्क पहुंचकर अपनी सभा की। इस दौरान प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे छात्र नेता आशुतोष पांडेय ने सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि लेखपाल, यूपीएसआई और एसएससी जीडी परीक्षाओं में हुई गड़बड़ियों ने युवाओं का भरोसा तोड़ा है।

भर्ती परीक्षाओं की निष्पक्ष जांच और दोबारा परीक्षा की मांग

छात्रों ने उत्तर प्रदेश सब-इस्पेक्टर और लेखपाल भर्ती परीक्षा की निष्पक्ष जांच कराने की मांग रखी है। युवाओं का कहना है कि गड़बड़ी साबित होने पर सरकार तुरंत दोबारा परीक्षा आयोजित करे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने यूपीएसआई भर्ती परीक्षा का स्कोर कार्ड भी जल्द जारी करने की अपील की है।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाएं युवाओं के भविष्य और सालों की कड़ी मेहनत का आधार होती हैं। चयन प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर होने वाली धांधली सीधे उनके सपनों पर चोट करती है। बार-बार होने वाले विवादों से परीक्षा कराने वाली सरकारी एजेंसियों की साख गिरी है।

युवाओं ने आरोप लगाया कि परीक्षा कराने वाली एजेंसियां अपनी जिम्मेदारियों को ठीक से नहीं निभा पा रही हैं। देश और प्रदेश के लाखों शिक्षित युवा सालों से तैयारी कर रहे हैं। मगर भर्तियों में देरी, पेपर लीक और लटकी नियुक्तियों के कारण उनका भविष्य अब पूरी तरह अंधकार में दिख रहा है।

प्रदर्शन में शामिल वक्ताओं ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि पिछले नौ सालों में देश में ९१ से अधिक पेपर लीक और परीक्षा घोटाले हुए हैं। इन घोटालों ने लगभग दो करोड़ से ज्यादा छात्रों के भविष्य और उम्मीदों को गहरा नुकसान पहुंचाया है।

लंबी खिंचती भर्ती प्रक्रियाओं से खत्म हो रही युवाओं की उम्र

छात्रों का दर्द छलक उठा कि सरकारी विज्ञापन निकलने के बाद भी चयन प्रक्रिया बहुत लंबी खिंच जाती है। इस लचर और कथित भ्रष्ट व्यवस्था के कारण युवाओं की उम्र और उम्मीद दोनों खत्म हो रही है। प्रदर्शन में प्रशांत, हिमांशु, शशांक, अनुराग मिश्र और आनंद ने अपने विचार साझा किए।

छात्रों ने सरकारी आंकड़ों के जरिए रोजगार की स्थिति पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि वर्ष २०१४ से २०२५ के बीच अकेले रेलवे में ८४ हजार से ज्यादा नियमित पदों की कमी आई है। सरकारी नौकरियों के ग्राफ में लगातार गिरावट दर्ज की जा रही है, जो युवाओं के लिए चिंताजनक है।

सीएमआईई की रिपोर्ट का हवाला देते हुए छात्रों ने कहा कि २०१५-१६ से २०२२-२३ के बीच सरकारी नौकरियों में करीब २० प्रतिशत की कमी आई है। आशुतोष पांडेय ने साफ किया कि सम्मानजनक रोजगार और पारदर्शी भर्ती प्रणाली युवाओं का संवैधानिक अधिकार है। छात्र इसके लिए अपना संघर्ष आगे भी जारी रखेंगे।

Author: Ajay Mishra

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