भारत-चीन सीमा विवाद पर बीजिंग से आई बड़ी खबर, म्यांमार के राष्ट्रपति की भारत यात्रा और घुसपैठियों पर सरकार का कड़ा रुख

Delhi News: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए बीजिंग में डब्ल्यूएमसीसी की 35वीं महत्वपूर्ण बैठक संपन्न हुई। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि यह चर्चा बेहद सकारात्मक रही। भारतीय संयुक्त सचिव की अगुवाई में दोनों देशों ने सीमा प्रबंधन और आपसी सहयोग बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श किया है।

इस उच्च स्तरीय बैठक में दोनों देशों ने सीमाओं पर शांति बनाए रखने के लिए नए तंत्र निर्माण पर जोर दिया। इसके अलावा भारतीय राजनयिकों ने सीमा पार से बहने वाली नदियों के गंभीर मुद्दे को भी मजबूती से उठाया। भारत चाहता है कि इस विषय पर अगली विशेषज्ञ स्तरीय बातचीत जल्द से जल्द चीन में आयोजित हो।

म्यांमार के राष्ट्रपति का दिल्ली दौरा और द्विपक्षीय व्यापार वार्ता

पड़ोसी देश म्यांमार के राष्ट्रपति एक बड़े व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल के साथ 30 मई से 2 जून तक भारत के आधिकारिक दौरे पर रहेंगे। वे दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच प्राचीन सांस्कृतिक और सभ्यतागत संबंधों को और अधिक मजबूत करने पर रणनीतिक चर्चा होगी।

म्यांमार के राष्ट्रपति अपने इस चार दिवसीय दौरे के दौरान व्यापारिक बैठकों के लिए मुंबई और बोधगया का भी दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य आर्थिक संबंधों को बढ़ाना है। दोनों देश मिलकर सीमा सुरक्षा, आपसी संपर्क और क्षेत्रीय विकास से जुड़े अहम मुद्दों पर अंतिम सहमति बनाएंगे।

अवैध बांग्लादेशी नागरिकों के निर्वासन पर विदेश मंत्रालय का बड़ा कदम

देश में रह रहे अवैध नागरिकों के मुद्दे पर सरकार ने अपना रुख साफ कर दिया है। रणधीर जायसवाल ने कहा कि सभी अवैध प्रवासियों के साथ सख्त कानून के तहत ही निपटा जाएगा। भारत सरकार ने अब तक 2,680 से अधिक संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों की सूची नागरिकता सत्यापन के लिए ढाका भेजी है।

यह नागरिकता सत्यापन पिछले 5 वर्षों या उससे अधिक समय से बांग्लादेश सरकार के पास लंबित पड़ा है। विदेश मंत्रालय को उम्मीद है कि इस गंभीर विषय पर पड़ोसी देश से जल्द ही सकारात्मक जवाब मिलेगा। इसके तुरंत बाद तय द्विपक्षीय व्यवस्था के आधार पर इन सभी अवैध नागरिकों को वापस भेजा जाएगा।

अफ्रीका को चिकित्सा सहायता और फारस की खाड़ी में भारतीय जहाज

वैश्विक मंच पर अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए भारत ने अफ्रीका महाद्वीप में फैले स्वास्थ्य संकट से निपटने के लिए हाथ आगे बढ़ाया है। भारत ने चिकित्सा सामग्री की अपनी पहली बड़ी खेप अफ्रीका सीडीसी को सफलतापूर्वक भेज दी है। युगांडा में तैनात भारतीय उच्चायुक्त ने खुद इस आपातकालीन राहत सामग्री को वहां के स्थानीय अधिकारियों को सौंपा।

इसके साथ ही विदेश मंत्रालय ने फारस की खाड़ी में फंसे भारतीय जहाजों की सुरक्षा पर ताजा जानकारी साझा की है। सरकार के प्रयासों से 14 भारतीय व्यावसायिक जहाज होर्मुज जलडमरूमध्य को सुरक्षित पार करके भारत लौट आए हैं। हालांकि 11 अन्य भारतीय जहाज अब भी सुरक्षा कारणों से फारसी खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं।

Author: Harikarishan Sharma

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