Delhi News: केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने यूनिफॉर्म सिविल कोड को लेकर एक बड़ा दावा किया है। उन्होंने कहा कि गैर-भाजपा शासित राज्यों की जनता भी अपनी सरकारों को यूसीसी लागू करने के लिए मजबूर कर देगी। भारतीय संविधान में इस खास कानून का प्रावधान पहले से ही मौजूद है।
कानून मंत्री ने एक विशेष साक्षात्कार में भाजपा शासित राज्यों असम, गुजरात और उत्तराखंड में यूसीसी कानून पारित होने का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि तीन राज्य इस दिशा में आगे बढ़ चुके हैं। कई अन्य राज्यों ने इस संवेदनशील मुद्दे की गहन जांच के लिए विशेष कमेटियां बनाई हैं।
बाबा साहेब आंबेडकर के विजन और राज्य के नीति निर्देशक तत्व
मेघवाल ने कहा कि जब देश का संविधान बन रहा था, तब भी समान नागरिक संहिता की मांग पुरजोर तरीके से उठी थी। संविधान निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर ने भी कहा था कि देश को इस दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। तत्कालीन नेताओं ने इसे बाद के लिए छोड़ दिया था।
इसके बाद इस महत्वपूर्ण विषय को संविधान में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के तहत शामिल किया गया था। यूसीसी का मुख्य मतलब ऐसे समान नागरिक कानूनों से है, जो शादी, तलाक, गोद लेने, उत्तराधिकार और संपत्ति विरासत जैसे पारिवारिक मामलों में सभी धर्मों के नागरिकों पर समान रूप से लागू होते हैं।
रिटायर्ड जजों के कूलिंग-ऑफ पीरियड के विचार को किया पूरी तरह खारिज
सेवानिवृत्त जजों को कोई भी सरकारी जिम्मेदारी सौंपने से पहले अनिवार्य ‘कूलिंग-ऑफ पीरियड’ लागू करने के विचार को कानून मंत्री ने खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि विवेकशील और मानसिक रूप से पूरी तरह स्वस्थ लोगों को राष्ट्र हित में काम करने से रोकने का कोई तार्किक औचित्य नहीं है।
कानून मंत्री ने देश के विभिन्न न्यायाधिकरणों में खाली पड़े पदों की ओर विशेष इशारा किया। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त न्यायाधीशों को मनाने की लगातार कोशिशों के बावजूद कई महत्वपूर्ण पद खाली पड़े हैं। दरअसल, अधिकांश रिटायर्ड जज सरकारी पदों के बजाय स्वतंत्र मध्यस्थता का काम करना अधिक पसंद कर रहे हैं।
साल 2029 के संसदीय चुनावों से पहले लागू होगा महिला आरक्षण कानून
केंद्रीय मंत्री मेघवाल ने देश की महिलाओं के लिए एक और बड़ी खुशखबरी साझा की है। उन्होंने बताया कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने वाले ऐतिहासिक कानून के लिए अब देश को ज्यादा लंबा इंतजार बिल्कुल नहीं करना पड़ेगा।
उन्होंने स्पष्ट संकेत दिया कि यह ऐतिहासिक महिला आरक्षण कानून साल 2029 के संसदीय चुनावों से पहले हर हाल में लागू हो जाएगा। कानून मंत्री ने जोर देकर कहा कि देश के अगले लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी व्यवस्था और कानून के मोर्चे पर बहुत सारी नई चीजें धरातल पर दिखाई देंगी।
Author: Harikarishan Sharma

