Business News: केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार देश के लाखों गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा (सोशल सिक्योरिटी) का बड़ा सुरक्षा कवच देने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। इसके लिए एक बेहद महत्वाकांक्षी सरकारी योजना लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है।
इस नई योजना के तहत सरकार इन कामगारों को एक्सीडेंटल इंश्योरेंस, बेहतरीन हेल्थ फैसलिटीज, मैटरनिटी सपोर्ट, बुजुर्गों के लिए सुरक्षा, नकद सहायता, एजुकेशन लोन और अंतिम संस्कार जैसे खर्चों के लिए सीधे आर्थिक मदद देने जा रही है। इसकी आधिकारिक जानकारी श्रम और रोजगार मंत्रालय द्वारा दी गई है।
मंत्रालय के संयुक्त सचिव और महानिदेशक (श्रम कल्याण) आशुतोष पेडनेकर ने बताया कि सरकार ने गिग वर्कर्स को तमाम बुनियादी सुविधाएं देने के लिए अपने कदम बढ़ा दिए हैं। इसके लिए ‘नेशनल सोशल सिक्योरिटी बोर्ड फॉर गिग एंड प्लेटफॉर्म वर्कर्स’ को लागू करने की मंजूरी दे दी गई है।
यह नवगठित बोर्ड इस विशेष क्षेत्र में काम करने वाले सभी अस्थायी कर्मचारियों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का खाका तैयार करेगा। इसके साथ ही सरकार की तरफ से गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए एक विशेष ‘सोशल सिक्योरिटी फंड’ का निर्माण भी किया जा रहा है।
इस फंड के जरिए ही कामगारों को दुर्घटना बीमा, स्वास्थ्य लाभ और शिक्षा ऋण जैसी महत्वपूर्ण वित्तीय सहायता सीधे प्रदान की जाएगी। इन कल्याणकारी योजनाओं के अंतिम स्वरूप को तय करने के लिए सरकार वर्तमान में बड़े फंड मैनेजर्स और दूसरे संबंधित पक्षों के साथ लगातार बातचीत कर रही है।
कंपनियों को 22 जून तक कर्मचारियों का डेटा जोड़ने का निर्देश
सरकार की ओर से सभी प्रमुख एग्रीगेटर और प्लेटफॉर्म कंपनियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने सभी कर्मचारियों का पूरा डेटा आगामी 22 जून तक ई-श्रम पोर्टल से अनिवार्य रूप से जोड़ दें। ऐसा करने से सभी पात्र कामगारों को सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिलना सुनिश्चित हो सकेगा।
इस नई योजना के तहत बड़ी एग्रीगेटर कंपनियों का डेटाबेस और सरकार का आधिकारिक ई-श्रम पोर्टल एक-दूसरे से सीधे लिंक हो जाएंगे। इस डिजिटल एकीकरण से कर्मचारियों को मिलने वाली सभी सुविधाओं की रियल-टाइम ट्रैकिंग करना बेहद आसान और संभव हो जाएगा।
इसके अलावा, काम करने वाले लोग एक समर्पित मोबाइल ऐप के जरिए अपने अधिकारों, मिलने वाले लाभों और फंड के इस्तेमाल की पूरी जानकारी खुद देख सकेंगे। इस पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहेगी और कंपनियों की जवाबदेही भी तय की जा सकेगी।
जानिए आखिर कौन होते हैं गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स?
गिग वर्कर्स ऐसे कर्मचारी होते हैं जो पारंपरिक परमानेंट नौकरी (नियोक्ता संबंध) से बाहर रहकर केवल तय समय या किसी खास प्रोजेक्ट के आधार पर काम करते हैं। इस श्रेणी में मुख्य रूप से फ्रीलांसर, स्वतंत्र ठेकेदार और पार्ट-टाइम काम करने वाले लोग शामिल होते हैं।
दूसरी तरफ, प्लेटफॉर्म वर्कर्स वे कहलाते हैं जो किसी ऑनलाइन मोबाइल ऐप या डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए सीधे आम लोगों या कंपनियों को अपनी सेवाएं देते हैं। उदाहरण के लिए, ओला-उबर के ड्राइवर या स्विगी-जोमैटो के डिलीवरी ब्वॉय प्लेटफॉर्म वर्कर की कैटेगरी में आते हैं।
भारत के इतिहास में यह पहली बार हो रहा है जब नए श्रम कानूनों के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को सामाजिक सुरक्षा के दायरे में लाया गया है। फिलहाल देश में करीब 1 करोड़ गिग वर्कर्स हैं और दशक के अंत तक यह संख्या 2.5 करोड़ पहुंचने की उम्मीद है।
Author: Rajesh Kumar

