Kanpur News: कानपुर के मछरिया क्षेत्र में जमीन कब्जाने के विवाद ने पुलिस विभाग में हलचल मचा दी है। एक पक्ष की शिकायत के बाद जांच में गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। मामले में आवास विकास चौकी इंचार्ज और नौबस्ता थाने में तैनात एक दारोगा को निलंबित कर दिया गया है। दोनों पर जांच को प्रभावित करने और पक्षपातपूर्ण कार्रवाई के आरोप लगे थे।
डीसीपी दक्षिण दीपेंद्रनाथ चौधरी ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले की विस्तृत जांच कराई गई। जांच में आरोपों को प्रथम दृष्टया सही पाया गया। इसके बाद आवास विकास चौकी इंचार्ज शैलेंद्र सिंह राघव और दारोगा अंकित खटाना को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया। दोनों के खिलाफ विभागीय जांच भी शुरू कर दी गई है।
जमीन के स्वामित्व को लेकर शुरू हुआ विवाद
दहेली उजागर गांव निवासी अर्जुन सिंह का दावा है कि उन्होंने वर्ष 1987 में संबंधित भूमि खरीदी थी। उनके अनुसार जमीन की आराजी संख्या और स्वामित्व से जुड़े सभी दस्तावेज उनके पक्ष में हैं। अर्जुन ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने प्लाट पर अवैध कब्जे का प्रयास किया और विरोध करने पर मारपीट तथा धमकी भी दी गई।
अर्जुन का कहना है कि उन्होंने कई बार नौबस्ता थाने में शिकायत दर्ज कराने का प्रयास किया, लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई। बाद में डीसीपी दक्षिण से शिकायत करने पर जनवरी 2026 में आरोपितों के खिलाफ बलवा, धमकी और अपमान से जुड़ी धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया था।
लेखपाल की रिपोर्ट ने बदला मामला
मामले की जांच के दौरान राजस्व विभाग से रिपोर्ट मांगी गई। लेखपाल की जांच में सामने आया कि अर्जुन जिस आराजी संख्या पर दावा कर रहे थे, वह उसी भूमि से संबंधित थी। वहीं दूसरे पक्ष द्वारा बताई गई आराजी संख्या विवादित प्लाट से लगभग 600 मीटर दूर स्थित दूसरे भूखंड की निकली।
इस रिपोर्ट के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया। शिकायतकर्ता पक्ष का आरोप है कि स्पष्ट तथ्यों के बावजूद पुलिस ने निष्पक्ष कार्रवाई नहीं की। इसी आधार पर चौकी इंचार्ज और दारोगा पर दूसरे पक्ष के साथ मिलीभगत कर जांच प्रभावित करने के आरोप लगाए गए थे।
दूसरे पक्ष ने भी किया अपना दावा
दूसरे पक्ष से जुड़े आनंद कुमार ने अदालत में दावा किया कि वह लंबे समय से संबंधित भूमि पर कब्जे में हैं। उन्होंने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और अपने अधिकारों की रक्षा की मांग की। अदालत ने मामले की सुनवाई के दौरान पुलिस और प्रशासन को हस्तक्षेप से बचने के निर्देश दिए थे।
आनंद कुमार ने आरोप लगाया कि कुछ लोगों ने जबरन प्लाट में प्रवेश कर कब्जा करने की कोशिश की। उन्होंने मारपीट, तोड़फोड़ और सामान ले जाने के आरोप भी लगाए। इसी आधार पर दूसरे पक्ष की ओर से भी पुलिस में शिकायत दर्ज कराई गई थी।
पुलिस कार्रवाई पर उठे गंभीर सवाल
जमीन विवाद के बीच पुलिस की भूमिका को लेकर सवाल खड़े होने लगे। शिकायतकर्ता पक्ष ने आरोप लगाया कि जांच निष्पक्ष नहीं रही और प्रभावशाली लोगों के पक्ष में कार्रवाई की गई। मामले की समीक्षा के बाद वरिष्ठ अधिकारियों ने जांच कराई, जिसमें कई बिंदुओं पर पुलिस कर्मियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई।
डीसीपी दक्षिण ने कहा कि मामले में निष्पक्षता बनाए रखना पुलिस की जिम्मेदारी है। यदि कोई अधिकारी अपने पद का दुरुपयोग करता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल दोनों निलंबित पुलिस कर्मियों के खिलाफ विभागीय जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।
Author: Raj Thakur

