हिमाचल में कुदरत का कहर: सेब के बगीचों में बिछी सफेद मौत की चादर, बागवानों की बरसों की मेहनत मिट्टी में मिली!

Himachal News: हिमाचल प्रदेश के बागवानों पर कुदरत का कहर टूट पड़ा है। बेमौसमी बर्फबारी और भारी ओलावृष्टि ने सेब सहित अन्य फलों की फसलों को बर्बाद कर दिया है। ऊपरी इलाकों में हालात इतने खराब हैं कि पेड़ों की टहनियां बर्फ का बोझ नहीं सह सकीं। कई जगहों पर पूरे के पूरे पेड़ ही जड़ से उखड़ गए हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने न केवल इस साल की फसल बल्कि बागवानों की कई सालों की मेहनत को भी मिट्टी में मिला दिया है।

फ्लावरिंग के समय ओलों ने मचाई भारी तबाही

इस समय प्रदेश के मध्यम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सेब के पेड़ों पर फ्लावरिंग का दौर चल रहा है। बागवानी विशेषज्ञों के अनुसार, यह समय फसल के लिए सबसे संवेदनशील होता है। अचानक हुई ओलावृष्टि ने पेड़ों से फूलों और कलियों को पूरी तरह झाड़ दिया है। इससे पौधों के कमजोर होने का खतरा बढ़ गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस तबाही का सीधा असर फलों की गुणवत्ता और कुल उत्पादन पर पड़ना तय है।

बागवानों की 70 प्रतिशत फसल हुई पूरी तरह बर्बाद

हिमाचल के बागवान अब अपनी आजीविका को लेकर गहरे संकट में हैं। स्थानीय बागवान पवन ठाकुर और वरुण वर्मा ने बताया कि कई क्षेत्रों में 60 से 70 प्रतिशत तक फसल नष्ट हो चुकी है। पहले सर्दियों में सूखे ने बागवानों को परेशान किया था और अब इस आपदा ने रही-सही उम्मीदें भी तोड़ दी हैं। बागवानी पर निर्भर हजारों परिवारों के सामने अब भविष्य का आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। बगीचों में सिर्फ टूटी हुई टहनियां और गिरे हुए फूल नजर आ रहे हैं।

सरकार से विशेष मुआवजे और कमेटी गठन की गुहार

भारी वित्तीय नुकसान झेल रहे बागवानों ने अब राज्य सरकार की ओर रुख किया है। उन्होंने मांग की है कि सरकार जल्द से जल्द एक विशेष कमेटी गठित करे। यह कमेटी प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर नुकसान का सटीक आकलन करे। बागवानों का कहना है कि उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए ताकि वे इस संकट से उबर सकें। सरकार की मदद के बिना हजारों परिवारों के लिए आजीविका का संकट दूर करना नामुमकिन नजर आ रहा है।

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