Delhi News: दिल्ली में मानसून की दस्तक से पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बहुत बड़ा फैसला लिया है. उन्होंने साफ कर दिया है कि इस बार बारिश के दौरान लापरवाही करने वाले अधिकारियों को कोई राहत नहीं मिलेगी. राजधानी में हर साल होने वाले भीषण जलभराव को रोकने के लिए सरकार ने कमर कस ली है.
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी महत्वपूर्ण विभागों के साथ एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की. इस बैठक में उन्होंने एक व्यापक कार्ययोजना लागू करते हुए कड़ा संदेश दिया. सीएम ने कहा कि यदि किसी भी इलाके में पानी भरा, तो संबंधित विभाग के नोडल अधिकारी की सीधे जवाबदेही तय की जाएगी.
सचिवालय में जारी हुआ दिल्ली का नया फ्लड कंट्रोल ब्लूप्रिंट
दिल्ली सचिवालय में आयोजित शीर्ष समिति की बैठक में मुख्यमंत्री ने ‘फ्लड कंट्रोल ऑर्डर-2026’ जारी किया. यह सरकारी दस्तावेज केवल एक औपचारिक आदेश नहीं है. यह मानसून के दौरान सभी प्रशासनिक विभागों के लिए एक महत्वपूर्ण ऑपरेशनल गाइडलाइन के रूप में काम करेगा.
इस मास्टर प्लान में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम, यमुना तटबंधों की सुरक्षा और नए पंपिंग स्टेशनों की तैयारी शामिल है. सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि तेज बारिश के दौरान अलग-अलग विभागों के बीच आपसी तालमेल और आवश्यक समन्वय की कोई कमी न रहे.
हर जलभराव वाले पॉइंट पर तैनात रहेगा एक जिम्मेदार नोडल अधिकारी
इस बार सरकार की सबसे बड़ी घोषणा यह है कि राजधानी के हर चिन्हित जलभराव वाले स्थान पर एक विशेष नोडल अधिकारी नियुक्त किया जाएगा. इन सभी अधिकारियों की जिम्मेदारियां पहले से तय कर दी गई हैं. किसी भी आपातकालीन समस्या की स्थिति में सीधे उन्हीं से जवाब मांगा जाएगा.
इसके अलावा दिल्ली का केंद्रीय बाढ़ नियंत्रण कक्ष 15 जून से चौबीसों घंटे लगातार काम कर रहा है. अलग-अलग संवेदनशील सेक्टरों के लिए उच्च स्तरीय समितियां बनाई गई हैं. इन समितियों में कई जिला मजिस्ट्रेट शामिल हैं, जो राहत कार्यों और विभागीय समन्वय की जिम्मेदारी संभालेंगे.
यमुना किनारे डिजिटल सिस्टम एक्टिव और 30 लाख टन गाद साफ
सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग ने यमुना के किनारे स्थित तटबंधों और रेगुलेटरों को पूरी तरह मजबूत कर दिया है. एक नया डिजिटल सिस्टम भी तैयार किया गया है. यह सिस्टम हथिनीकुंड बैराज से छोड़े जाने वाले पानी और यमुना के जलस्तर की एकदम रियल टाइम जानकारी देगा.
सरकार ने दावा किया है कि इस वर्ष 22 बड़े नालों समेत कुल 77 प्रमुख नालों से 30 लाख मीट्रिक टन से अधिक गाद हटाई जा चुकी है. इसके साथ ही जल निकासी के लिए स्थायी और मोबाइल पंपों की संख्या बढ़ाकर 243 से अधिक कर दी गई है.
Author: Gaurav Malhotra


