Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश के सरकारी विभागों और सार्वजनिक उपक्रमों में कार्यरत करीब 12 हजार मल्टी टास्क वर्करों के लिए बड़ी राहत भरी खबर है। लंबे समय से कम मानदेय और अनिश्चितता का दंश झेल रहे इन दैनिक कर्मचारियों के लिए आखिरकार सुक्खू सरकार एक मजबूत और स्थायी नीति तैयार करने जा रही है।
इस बेहद संवेदनशील विषय पर उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में एक विशेष मंत्रिमंडलीय उपसमिति का गठन किया गया है। इस समिति में कैबिनेट मंत्री रोहित ठाकुर और राजेश धर्माणी शामिल हैं। यह कमेटी वर्करों से जुड़े सभी कानूनी और आर्थिक पहलुओं पर गहराई से मंथन करेगी।
मंत्रिमंडलीय उपसमिति की बैठक में प्रारूप पर लगेगी अंतिम मुहर
इस महत्वपूर्ण नीति को लेकर 19 जून को एक अहम बैठक होने की पूरी संभावना है। इस बैठक में नई नीति के अंतिम प्रारूप को मंजूरी मिल सकती है। इससे पहले हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने खुद कर्मचारियों के लिए नीति निर्धारण करने का भरोसा दिया था।
फिलहाल प्रदेश के शिक्षा, लोक निर्माण और जल शक्ति जैसे बड़े सरकारी विभागों में हजारों कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रहे हैं। विडंबना यह है कि अभी तक इन वर्करों के लिए कोई तय सर्विस रूल नहीं बने हैं। इन्हें केवल 5500 से 6000 रुपये मासिक मानदेय मिलता है, जो बहुत कम है।
पांच से सात साल की सेवा के बाद नियमितीकरण की मांग
विभिन्न कर्मचारी संगठन पिछले काफी समय से सरकार से मांग कर रहे हैं कि उनके भविष्य को सुरक्षित किया जाए। वर्कर पांच साल की सेवा अवधि पूरी होने के बाद पक्की पॉलिसी बनाने की मांग पर अड़े हैं। इन कर्मियों को लगातार काम करते हुए अब पांच से सात साल का समय बीत चुका है।
पिछली भाजपा सरकार के कार्यकाल में महिंद्र सिंह ठाकुर की अध्यक्षता में एक उपसमिति बनी थी। उस समय इन कर्मियों को प्रति माह महज 3 हजार रुपये मिलते थे। वर्तमान कांग्रेस सरकार ने मानदेय में बढ़ोतरी की थी। अब स्थायी नीति बनने से इन हजारों परिवारों का भविष्य हमेशा के लिए सुरक्षित हो जाएगा।
Reported By: Sunita Gupta


