हिमाचल में घूमना अब होगा महंगा! नेशनल पार्क और वाइल्डलाइफ सेंचुरी में एंट्री के लिए ढीली करनी होगी जेब, जानें नए रेट्स

Himachal News: हिमाचल प्रदेश की प्राकृतिक खूबसूरती का आनंद लेना अब पर्यटकों के लिए महंगा होने वाला है। राज्य सरकार ने प्रदेश के सभी नेशनल पार्कों और वन्यजीव अभयारण्यों में प्रवेश शुल्क बढ़ाने का बड़ा फैसला लिया है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है। इसके तहत केवल एंट्री फीस ही नहीं, बल्कि फिल्म शूटिंग और फोटोग्राफी की दरों में भी भारी बढ़ोतरी की जाएगी।

52 साल बाद बदला गया शुल्क ढांचा

वन विभाग ने इस संबंध में एक विस्तृत प्रस्ताव तैयार कर विधि विभाग को भेज दिया है। दिलचस्प बात यह है कि प्रदेश में वन्यजीव क्षेत्रों के लिए शुल्क का निर्धारण आखिरी बार वर्ष 1974 में किया गया था। पिछले 52 वर्षों से इन दरों में कोई बदलाव नहीं हुआ था। अब सरकार ने आधुनिक जरूरतों और रखरखाव के खर्च को देखते हुए 24 अलग-अलग श्रेणियों के शुल्कों को संशोधित करने का निर्णय लिया है।

200 रुपये से शुरू होगी एंट्री फीस

नए नियमों के लागू होने के बाद न्यूनतम प्रवेश शुल्क में बड़ी वृद्धि देखने को मिलेगी। वर्तमान में यह शुल्क 2 रुपये से 100 रुपये के बीच है, जिसे अब बढ़ाकर कम से कम 200 रुपये किया जा रहा है। विधि विभाग से हरी झंडी मिलते ही वन विभाग इसकी आधिकारिक अधिसूचना जारी कर देगा। सरकार का तर्क है कि इस बढ़ी हुई राशि का उपयोग पार्कों के बेहतर रखरखाव और पर्यटकों को आधुनिक सुविधाएं देने के लिए किया जाएगा।

हिमाचल के इन पांच नेशनल पार्कों पर होगा असर

हिमाचल प्रदेश में वर्तमान में पांच प्रमुख नेशनल पार्क हैं, जो अपनी जैव विविधता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध हैं। इनमें ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क, पिन वैली, खीरगंगा, इंद्रकीला और सिम्बल बाड़ा शामिल हैं। इन पार्कों का कुल क्षेत्रफल लगभग 2407 वर्ग किलोमीटर है। इसके अलावा प्रदेश में 26 वन्यजीव अभयारण्य भी हैं, जहां अब पर्यटकों और शोधकर्ताओं को नई दरों के अनुसार भुगतान करना होगा।

देश के सर्वश्रेष्ठ संरक्षित क्षेत्रों में हिमाचल का दबदबा

हिमाचल के ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क और तीर्थन वन्यजीव अभयारण्य को भारत के सर्वश्रेष्ठ प्रतिबंधित संरक्षित क्षेत्रों में गिना जाता है। इसके अलावा सैंज वन्यजीव अभयारण्य भी देश के शीर्ष पांच क्षेत्रों में शामिल है। यही कारण है कि यहां हर साल लाखों की संख्या में देशी-विदेशी पर्यटक और फिल्म निर्माता पहुंचते हैं। सरकार अब इस लोकप्रियता के जरिए विभाग की आय को बढ़ाने की दिशा में कदम उठा रही है।

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