कर्मचारियों के डेपुटेशन खेल पर हाई कोर्ट सख्त, अब बिना सर्टिफिकेट नहीं मिलेगी सैलरी, डीडीओ पर गिरेगी गाज

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के डेपुटेशन के खेल को रोकने के लिए बड़ा कदम उठाया है। अदालत ने सभी ड्राइंग एंड डिसबर्सिंग ऑफिसर (डीडीओ) की सीधी जिम्मेदारी तय करने के सख्त आदेश दिए हैं। अब डीडीओ को कर्मचारी के सैलरी बिल पर अनिवार्य सर्टिफिकेट दर्ज करना होगा।

अदालत के नए आदेश के अनुसार, डीडीओ को इस सर्टिफिकेट में स्पष्ट प्रमाणित करना होगा कि संबंधित सरकारी कर्मचारी ने वास्तव में उस महीने के दौरान उसी स्टेशन पर काम किया है, जिसके वेतन का दावा किया जा रहा है। इस जरूरी सर्टिफिकेट के बिना ट्रेजरी विभाग कोई भी सैलरी बिल पास नहीं करेगा।

लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों पर होगी बड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई

मुख्य न्यायाधीश गुरमीत सिंह संधावालिया और न्यायाधीश बीसी नेगी की खंडपीठ ने इस मामले पर सख्त रुख अपनाया है। हाई कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यदि बिना सर्टिफिकेट के सैलरी बिल पास किया गया, तो संबंधित डीडीओ और ट्रेजरी ऑफिसर के खिलाफ सीधी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

इसके साथ ही हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिए हैं कि वह कर्मचारियों की सर्विस बुक रिकॉर्ड में उनके डेपुटेशन और दूसरी जगह तैनाती की पूरी जानकारी तुरंत दर्ज करने के निर्देश जारी करे। अदालत ने एक जनहित याचिका का निपटारा करते हुए यह ऐतिहासिक फैसला सुनाया है।

सर्विस बुक रिकॉर्ड में अलग से गिनी जाएगी अवधि

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया कि डेपुटेशन में बिताई गई अवधि को मूल पोस्टिंग स्टेशन की अवधि से पूरी तरह अलग और स्पष्ट रूप से गिना जाए। भविष्य में होने वाले ट्रांसफर, पोस्टिंग और प्रमोशन से जुड़े लाभ सहित सभी सरकारी उद्देश्यों के लिए यह विवरण दर्ज करना बेहद जरूरी है।

अदालत के संज्ञान में लाया गया था कि शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग के कई रसूखदार कर्मचारी खुद को दूसरी जगह डेपुटेशन पर समायोजित करवा लेते हैं। वे दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने से बचने के लिए ऐसा करते हैं, जबकि वेतन पुरानी जगह से ही लेते रहते हैं।

Reported By: Sunita Gupta

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