नीट परीक्षा से पहले टेलीग्राम पर लगा अस्थायी बैन, सरकार ने कोर्ट में बताया अपराधियों का नया ‘डार्क वेब’

Delhi News: नीट यूजी री-एग्जामिनेशन से ठीक पहले भारत सरकार ने टेलीग्राम ऐप पर अस्थायी प्रतिबंध लगा दिया है। इस कड़े फैसले के खिलाफ मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम अब सीधे अदालत पहुंच गया है। केंद्र सरकार ने इस कानूनी लड़ाई के बीच दिल्ली हाई कोर्ट में अपनी जवाबी घेराबंदी पूरी तरह मजबूत कर ली है।

केंद्र सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में एक महत्वपूर्ण हलफनामा दायर किया है। सरकार का दावा है कि टेलीग्राम भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और डेटा शेयरिंग नियमों को लेकर बिल्कुल गंभीर नहीं है। सरकारी एजेंसियों के मुताबिक यह लोकप्रिय ऐप अब शातिर अपराधियों के लिए नया डार्क वेब बनता जा रहा है।

सरकार ने कहा रातोंरात नहीं लिया गया बड़ा फैसला

हाई कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने अपने इस कदम का जोरदार बचाव किया। सरकार की तरफ से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि यह कार्रवाई अचानक नहीं की गई है। गृह मंत्रालय और आईटी विभाग मई महीने से ही टेलीग्राम के अधिकारियों के साथ लगातार बैठकें कर रहे थे।

सॉलिसीटर जनरल ने अदालत को बताया कि सरकार को मई से इस ऐप के खिलाफ गंभीर शिकायतें मिल रही थीं। सुरक्षा एजेंसियों के पास ऐप के दुरुपयोग से जुड़े चौंकाने वाले सबूत और आंकड़े मौजूद हैं। सरकार ने आईटी एक्ट की धारा 69A के तहत अपनी आपातकालीन शक्तियों का उपयोग किया है।

चाइल्ड पोर्नोग्राफी और साइबर फ्रॉड का बड़ा जरिया

सरकारी हलफनामे के अनुसार टेलीग्राम चैनल्स का उपयोग चाइल्ड पोर्नोग्राफी फैलाने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के आंकड़ों के हवाले से सरकार ने बताया कि इस प्लेटफॉर्म पर फर्जी पहचान बनाकर बड़े वित्तीय घोटाले और साइबर फ्रॉड को अंजाम दिया जा रहा है।

इसके साथ ही हैकर्स इस ऐप पर भारतीय नागरिकों का पर्सनल डेटा और मोबाइल नंबर अवैध रूप से बेच रहे हैं। सरकार ने अदालत को बताया कि नीट जैसी बड़ी प्रतियोगी परीक्षाओं के लीक पेपर सर्कुलेट करने और आतंकवादी संगठनों द्वारा हिंसक प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए भी इसका इस्तेमाल हुआ है।

टेलीग्राम ने प्रतिबंध को बताया मनमाना और सख्त कदम

दूसरी तरफ टेलीग्राम कंपनी ने सरकार के इस फैसले को पूरी तरह मनमाना और जरूरत से ज्यादा सख्त बताया है। टेलीग्राम के सीनियर वकील ध्रुव मेहता ने अदालत में दलील दी कि कंपनी ने हमेशा भारतीय अधिकारियों का पूरा सहयोग किया है और चिन्हित किए गए संदिग्ध चैनल्स को ब्लॉक भी किया है।

कंपनी का कहना है कि इस तरह के अस्थायी प्रतिबंध से देश के करोड़ों आम यूजर्स की कनेक्टिविटी प्रभावित हो रही है। यह आदेश एक तरह से ब्लैंकेट बैन जैसा ही है। इस कानूनी खींचतान के बाद अब देश भर के सोशल मीडिया यूजर्स के बीच ऐप पर स्थायी प्रतिबंध की चर्चा तेज हो गई है।

Reported By: Gaurav Malhotra

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