New Delhi News: भारतीय नौसेना हिंद महासागर में अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक बड़े मिशन पर काम कर रही है। देश की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार ने प्रोजेक्ट-76 को हरी झंडी दे दी है। इसके तहत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से लैस बेहद आधुनिक पनडुब्बियां बनाई जाएंगी। यह ऐतिहासिक कदम भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने में सबसे मददगार साबित होगा।
भारतीय नौसेना को आत्मनिर्भर बनाएगा नया प्रोजेक्ट-76
इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत कुल 12 अत्याधुनिक डीजल-इलेक्ट्रिक पनडुब्बियों का निर्माण किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट भारतीय नौसेना का पहला ऐसा कार्यक्रम है जो पूरी तरह विदेशी डिजाइनों से मुक्त होगा। ये नई पनडुब्बियां नौसेना के बेड़े में शामिल पुरानी हो रही पनडुब्बियों की जगह लेंगी। इससे भारत की समुद्री सुरक्षा पहले से कई गुना अधिक मजबूत हो जाएगी।
रक्षा सूत्रों के अनुसार इस पूरे प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत लगभग 70 हजार करोड़ रुपये है। यह भारी-भरकम बजट पनडुब्बियों के नए डिजाइन, स्वदेशी तकनीक के विकास और निर्माण पर खर्च होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि देश में ही बड़े पैमाने पर उत्पादन होने से आने वाले समय में हर पनडुब्बी की निर्माण लागत में काफी कमी आएगी।
अत्याधुनिक हथियारों और नई स्टील्थ तकनीक से लैस होंगी पनडुब्बियां
इन नई पनडुब्बियों में लंबे समय तक पानी के अंदर रहने की क्षमता होगी। इनमें डीआरडीओ द्वारा विकसित विशेष एयर इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन यानी एआईपी सिस्टम लगाया जाएगा। इसके कारण ये पनडुब्बियां लगातार दो से तीन सप्ताह तक पानी के नीचे रह सकती हैं। इसके साथ ही इनमें लिथियम-आयन बैटरियों का आधुनिक पावर बैकअप भी मिलेगा।
दुश्मन के रडार से बचने के लिए इनमें एडवांस स्टील्थ तकनीक का इस्तेमाल होगा। इन पनडुब्बियों में लंबी दूरी की क्रूज मिसाइलों को दागने के लिए वर्टिकल लॉन्च सिस्टम यानी वीएलएस भी लगाया जाएगा। लगभग 3000 टन वजन वाली इन पनडुब्बियों में भारत का अपना स्वदेशी कॉम्बैट मैनेजमेंट सिस्टम और बेहद शक्तिशाली सोनार सेंसर फिट किए जाएंगे।
मझगांव डॉक और लार्सन एंड टुब्रो के बीच मुकाबला
इस बड़े प्रोजेक्ट के डिजाइन को तैयार करने में देश की दो दिग्गज कंपनियां जुटी हैं। सरकारी कंपनी मझगांव डॉक लिमिटेड यानी एमडीएल अपने कलवरी क्लास के अनुभव पर नया डिजाइन बना रही है। एमडीएल ने इसके लिए साल 2028 तक का लक्ष्य रखा है। यह दोनों कंपनियों की प्रतिस्पर्धा देश के रक्षा क्षेत्र के लिए बहुत फायदेमंद होगी।
दूसरी तरफ निजी क्षेत्र की दिग्गज कंपनी लार्सन एंड टुब्रो यानी एलएंडटी भी अपनी रेस में आगे है। एलएंडटी अपने परमाणु पनडुब्बी निर्माण के पुराने अनुभव का इस्तेमाल कर नया डिजाइन पेश कर रही है। कंपनी का लक्ष्य साल 2026-27 तक अपना काम पूरा करना है। दोनों कंपनियां साल 2028 तक नौसेना को फाइनल डिजाइन सौंप देंगी।
इस प्रोजेक्ट के तहत सरकारी मंजूरी मिलने के बाद साल 2028 से 2031 के बीच निर्माण कार्य शुरू हो जाएगा। पहली पनडुब्बी की डिलीवरी ऑर्डर मिलने के ठीक छह से सात साल बाद की जाएगी। तेज काम के लिए सरकार एमडीएल और एलएंडटी दोनों के शिपयार्ड में एक साथ समानांतर निर्माण कार्य शुरू करवा सकती है।
Author: Gaurav Malhotra


