Himachal News: हिमाचल प्रदेश में पंचायत और नगर निकाय चुनावों की रणभेरी जल्द ही बजने वाली है। राज्य निर्वाचन आयोग चुनाव की तैयारियों को अंतिम रूप दे रहा है। आयोग जल्द ही उच्च अधिकारियों के साथ बैठक कर विस्तृत शेड्यूल जारी करेगा। सूत्रों के अनुसार, इस बार पंचायत और शहरी निकायों के चुनाव एक साथ नहीं होंगे। आयोग दोनों के लिए अलग-अलग तारीखें तय करने की योजना बना रहा है। इससे कर्मचारियों की ड्यूटी लगाने में आसानी होगी।
दो अलग शेड्यूल से आसान होगी चुनावी प्रक्रिया
राज्य निर्वाचन आयोग का मुख्य फोकस चुनावी प्रक्रिया को पारदर्शी और सुचारू बनाना है। पंचायतों और नगर निकायों के चुनाव अलग-अलग समय पर करवाने का फैसला रणनीतिक है। इसका सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि ड्यूटी पर तैनात होने वाले कर्मचारियों का बेहतर प्रबंधन हो सकेगा। एक ही दिन चुनाव करवाने से अक्सर प्रशासनिक दिक्कतें आती हैं। अलग शेड्यूल से सुरक्षा व्यवस्था और पोलिंग स्टाफ की कमी जैसी समस्याएं पैदा नहीं होंगी।
आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू करने के नियम
स्थानीय निकाय चुनाव करवाने के लिए कुछ निर्धारित मापदंड तय किए गए हैं। आमतौर पर मतदान की तारीख से करीब 28 से 30 दिन पहले चुनाव की आधिकारिक घोषणा की जाती है। घोषणा के साथ ही संबंधित क्षेत्रों में आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू कर दी जाती है। वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए माना जा रहा है कि 18 अप्रैल के बाद चुनावी बिगुल बज सकता है। इसके बाद सभी सरकारी घोषणाओं पर रोक लग जाएगी।
हिमाचल दिवस के कार्यक्रमों के बाद जारी होगा शेड्यूल
प्रदेश में 15 अप्रैल को ‘हिमाचल दिवस’ धूमधाम से मनाया जाना है। सभी जिला मुख्यालयों पर इसके लिए बड़े सरकारी कार्यक्रम तय हो चुके हैं। यही कारण है कि निर्वाचन आयोग 15 अप्रैल के बाद ही चुनावी शेड्यूल जारी करेगा। हिमाचल दिवस पर मुख्यमंत्री अक्सर बड़ी घोषणाएं करते हैं। हालांकि, इस बार प्रदेश की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने की चर्चाएं भी गर्म हैं। सरकारी कर्मचारी और आम जनता इस दिन का बेसब्री से इंतजार कर रही है।
मतदाता सूचियों का अपडेशन और सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश
चुनाव की सुगबुगाहट के बीच मतदाता सूचियों को तैयार करने का काम जोरों पर है। पंचायती राज संस्थाओं और शहरी निकायों के लिए आरक्षण रोस्टर पहले ही जारी हो चुके हैं। अब नव गठित और पुनर्गठित क्षेत्रों में सूचियों को अद्यतन किया जा रहा है। सर्वोच्च न्यायालय ने सख्त निर्देश दिए हैं कि 31 मई से पहले स्थानीय निकायों के चुनाव संपन्न करवाने होंगे। इसी समय सीमा को ध्यान में रखते हुए आयोग युद्ध स्तर पर काम कर रहा है।


