Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी यानी रेरा ने शिमला के पास मशोबरा में चल रहे एक बड़े हाउसिंग प्रोजेक्ट के प्रमोटर पर कड़ा एक्शन लिया है। रेरा कोर्ट ने फ्लैट खरीदार के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए आरोपी कंपनी को पूरी रकम भारी ब्याज के साथ लौटाने का सख्त आदेश जारी किया है।
रेरा के चेयरमैन आरडी धीमान और सदस्य विदुर मेहता की बेंच ने यह फैसला बिहार के पटना की रहने वाली महिला नमिता सिंह की याचिका पर दिया है। शिकायतकर्ता ने मशोबरा हिल्स नामक आवासीय प्रोजेक्ट में दो बेडरूम का फ्लैट बुक किया था। इसके लिए उन्होंने बुकिंग राशि और निर्माण लागत के तौर पर कुल 78.10 लाख रुपये का भुगतान किया था।
तय समय पर नहीं मिला सपनों का आशियाना
महिला ने अपनी शिकायत में बताया कि बिल्डर कंपनी मैसर्स राजदीप एंड कंपनी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड ने 30 दिसंबर 2024 तक फ्लैट का कब्जा देने का वादा किया था। इसके साथ ही डेवलपर ने निवेश की गई रकम पर सात फीसदी सालाना फिक्स्ड रिटर्न देने का भरोसा भी दिया था। मगर तय समयसीमा बीतने के बाद भी खरीदार को फ्लैट नहीं मिला।
अथॉरिटी की सुनवाई में यह हैरान करने वाला खुलासा हुआ कि कंपनी ने खरीदार की मर्जी के बिना एक नया एग्रीमेंट पेपर तैयार कर लिया था। इसके जरिए प्रोजेक्ट पूरा करने की डेडलाइन को साल 2027 तक बढ़ाने की कोशिश की गई थी। रेरा बेंच ने बिल्डर के इस चालाकी भरे कदम को गैरकानूनी मानते हुए सिरे से खारिज कर दिया।
बिल्डर पर लगा रेरा कानून के उल्लंघन का आरोप
रेरा ने अपने आदेश में साफ कहा कि डेवलपर ने प्रोजेक्ट की सही स्थिति छुपाकर खरीदार को धोखा दिया है। कंपनी ने ग्राहकों से किए वादों को पूरा नहीं किया, जो सीधे तौर पर रेरा एक्ट 2016 के नियमों का उल्लंघन है। कोर्ट ने माना कि महिला को बैंक लोन की ईएमआई भरनी पड़ रही थी, जिससे उन्हें भारी मानसिक और आर्थिक तनाव झेलना पड़ा।
रेरा ने दोषी रियल एस्टेट कंपनी को आदेश दिया है कि वह अगले 60 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की पूरी रकम 10.80 प्रतिशत सालाना ब्याज के साथ वापस करे। अथॉरिटी ने चेतावनी दी है कि अगर तय समय के अंदर भुगतान नहीं हुआ, तो रेरा कानून की धारा 40 के तहत प्रॉपर्टी कुड़की और अन्य कानूनी रिकवरी की कार्रवाई की जाएगी।
Reported By: Sunita Gupta


