Himachal News: हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य के शिक्षा क्षेत्र में एक बहुत बड़ा और कड़ा प्रशासनिक निर्णय लिया है। सरकार ने पचहत्तर से कम विद्यार्थियों वाले 10 सरकारी डिग्री कॉलेजों का दूसरे बड़े संस्थानों में विलय करने की अंतिम मंजूरी दे दी है। इस संबंध में उच्चतर शिक्षा विभाग ने आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।
उच्चतर शिक्षा विभाग के निदेशक डॉ. हरीश कुमार द्वारा जारी सरकारी आदेश के अनुसार नए शैक्षणिक सत्र 2026-27 से इन प्रभावित कॉलेजों में प्रथम वर्ष के नए दाखिले पूरी तरह बंद रहेंगे। सरकार का मुख्य उद्देश्य सीमित संसाधनों का सही उपयोग और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता में बड़ा सुधार करना है।
इन दस डिग्री कॉलेजों के विलय की अधिसूचना हुई जारी
प्रशासनिक अधिसूचना के मुताबिक जिन डिग्री कॉलेजों को बंद कर दूसरे संस्थानों में मिलाया गया है, उनमें मुख्य रूप से टिक्कर, भलेई, कुकुमसेरी, कुपवी और संधोल कॉलेज शामिल हैं। इसके अतिरिक्त मुल्थान, जैनगर, ननखड़ी, रोनहाट और कोटली डिग्री कॉलेजों का अस्तित्व भी अब पूरी तरह समाप्त हो जाएगा।
शिक्षा निदेशक ने इन सभी प्रभावित कॉलेजों के प्राचार्यों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। वे अब किसी भी कक्षा में नया प्रवेश बिल्कुल न लें। डॉ. हरीश कुमार ने प्राचार्यों को दूसरे और तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों के लिए तुरंत विशेष काउंसलिंग सत्र आयोजित करने के आदेश भी दिए हैं।
इस विशेष काउंसलिंग के माध्यम से पुराने छात्रों को नए बड़े संस्थानों में प्रवेश लेने, नए विषय चयन करने और अन्य जरूरी शैक्षणिक प्रक्रियाओं की पूरी जानकारी दी जाएगी। सरकार पूरी कोशिश कर रही है कि वर्तमान में पढ़ाई कर रहे विद्यार्थियों का शैक्षणिक सत्र किसी भी तरह प्रभावित न हो।
अतिरिक्त खर्च से बचाने के लिए सरकार देगी मासिक स्टाइपेंड
राज्य सरकार ने प्रभावित हो रहे दूसरे और तीसरे वर्ष के विद्यार्थियों पर कोई अतिरिक्त वित्तीय बोझ न पड़ने देने का बड़ा फैसला किया है। इसके लिए सरकार प्रत्येक पात्र विद्यार्थी को 5,000 रुपये प्रति माह का विशेष स्टाइपेंड यानी वजीफा प्रदान करेगी, ताकि उनका खर्च चल सके।
यह मासिक वित्तीय सहायता केवल उन्हीं कॉलेजों में ट्रांसफर होने वाले विद्यार्थियों को मिलेगी, जिनके साथ मूल संस्थान का विलय किया गया है। यदि कोई छात्र स्वेच्छा से किसी अन्य कॉलेज में दाखिला लेता है, तो उसे यह सरकारी वित्तीय लाभ प्रदान नहीं किया जाएगा।
वास्तव में राज्य सरकार ने पिछले वर्ष ही इस कड़े फैसले को प्रशासनिक रूप से ले लिया था। हालांकि उस समय शैक्षणिक सत्र बीच में चलने और छात्रों के भारी विरोध के कारण इसे टाल दिया गया था। तब सरकार ने कोर्ट में कानूनी चुनौती से बचने के लिए इसे लागू नहीं किया था।
भवनों के भविष्य और छात्रों की मुश्किलों पर उठे सवाल
सरकार के इस बड़े फैसले पर अब कई तरह के गंभीर सवाल भी उठने लगे हैं। पहले स्थानीय ग्रामीण छात्र अपने घरों के बिल्कुल नजदीक स्थित कॉलेजों में आसानी से उच्च शिक्षा पा रहे थे। अब विलय के बाद उन्हें दूर जिला मुख्यालयों के बड़े शहरों तक जाना होगा।
इससे छात्रों के रहने, परिवहन और अन्य दैनिक खर्चों में भारी बढ़ोतरी होना पूरी तरह तय है। हालांकि शिक्षा विभाग का तर्क है कि मासिक स्टाइपेंड इसी अतिरिक्त खर्च को कवर करने के लिए दे रहे हैं। लाहुल-स्पीति जिले के सुदूर कुकुमसेरी कॉलेज के विद्यार्थियों पर इसका सबसे ज्यादा असर पड़ेगा।
कुकुमसेरी के छात्र-छात्राओं को अब आगे की कठिन पढ़ाई पूरी करने के लिए कुल्लू जाना होगा। इसके अलावा इन सुदूर क्षेत्रों में करोड़ों रुपये की भारी सरकारी लागत से निर्मित आलीशान कॉलेज भवनों और बेहतरीन आधारभूत ढांचे के भविष्य पर भी एक बहुत बड़ा प्रश्नचिह्न लग गया है।
Reported By: Sunita Gupta


