बरसात से पहले हिमाचल में बड़ा संकट, बिजली बोर्ड में 6500 पद खाली होने से ब्लैकआउट का खतरा

Himachal Pradesh News: हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड में इस समय करीब 6500 फील्ड तकनीकी कर्मचारियों की भारी कमी चल रही है। रिक्त पदों की इस बड़ी संख्या के कारण पूरे प्रदेश की बिजली व्यवस्था चरमरा गई है। आने वाले मानसून के सीजन में यह गंभीर समस्या एक बड़े संकट का रूप ले सकती है।

कर्मचारियों की कमी से लगातार बढ़ रहे जानलेवा हादसे

विद्युत बोर्ड तकनीकी कर्मचारी संघ ने स्टाफ की इस भारी कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष रणवीर सिंह ठाकुर ने बताया कि वर्तमान में केवल 40 प्रतिशत फील्ड स्टाफ ही कार्यरत है। यह सीमित अमला ही राज्य के लगभग 30 लाख उपभोक्ताओं को विद्युत आपूर्ति प्रदान कर रहा है।

फील्ड तकनीकी कर्मचारियों पर काम का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। अत्यधिक कार्यभार के कारण पिछले 8 वर्षों में बिजली लाइनों पर काम करते समय 150 से अधिक हादसे हो चुके हैं। इन दुर्घटनाओं में 55 कर्मचारी अपनी जान गंवा चुके हैं, जबकि 100 से अधिक लोग गंभीर रूप से अपंग हो गए।

शिमला और मंडी सहित चारों जोन में रिक्तियों की भरमार

विद्युत बोर्ड के सभी प्रमुख विंग और सर्किल इस समय स्टाफ की कमी से जूझ रहे हैं। शिमला जोन में टी-मेट के 88, असिस्टेंट लाइनमैन के 461 और लाइनमैन के 213 पद खाली पड़े हैं। इसी तरह सेंट्रल जोन मंडी के अंतर्गत टी-मेट के 471 और असिस्टेंट लाइनमैन के 267 पद रिक्त चल रहे हैं।

धर्मशाला और हमीरपुर जोन की स्थिति भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है। धर्मशाला जोन में टी-मेट के 952 और असिस्टेंट लाइनमैन के 574 पद खाली हैं। हमीरपुर सर्किल में भी टी-मेट के 548 और लाइनमैन के 164 पदों पर लंबे समय से कोई नई नियुक्ति नहीं की गई है।

मुख्यमंत्री से तुरंत नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग

तकनीकी कर्मचारी संघ ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री से तुरंत हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। संघ ने मांग की है कि विद्युत बोर्ड प्रबंधन जल्द से जल्द इन खाली पदों पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करे। इसके साथ ही फील्ड स्टाफ के ट्रांसफर और प्रमोशन की विसंगतियों को भी दूर किया जाए।

कर्मचारी संगठन ने खाली पड़े पदों पर योग्य कर्मियों को तुरंत पदोन्नति देने का भी आग्रह किया है। संघ ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार और मैनेजमेंट ने उनकी जायज मांगों को पूरा नहीं किया, तो वे बड़ा आंदोलन करेंगे। इस विरोध प्रदर्शन की पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार और विद्युत बोर्ड प्रबंधन की होगी।

Reported By: Sunita Gupta

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